भोपाल, 8 जुलाई 2026: कई बार जीवन में ऐसे प्रसंग भी होते हैं जो हास्य और व्यंग्य का अद्भुत उदाहरण बन जाते हैं। श्री संजय परमेश चतुर्वेदी का मामला कुछ ऐसा ही है। चतुर्वेदी जी अपने घर के सामने कीचड़ की शिकायत लेकर गए थे। जब नगर निगम के वार्ड कार्यालय पहुंचे तो वहां पर कार्यालय के सामने कीचड़ देखकर, अपनी शिकायत दर्ज करवाए बिना ही लौट आए। फिर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "उनका गम देखा तो, मैं अपना ग़म भूल गया"।
विश्वास सारंग की विधानसभा का किस्सा
श्री संजय परमेश चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, एक गाना है "उनका गम देखा तो, मैं अपना ग़म भूल गया" इसी गाने की तर्ज पर मैं विकास के लिए मर-मिटी सड़क की दशा बताने और उसे ठीक करवाने की गुहार लगाने वार्ड क्रमांक 75 के कार्यालय पहुंचा तो उसके सामने कीचड़ पसरी देख के विश्वास ही नहीं हुआ। विश्वास से याद आया कि मेरा वार्ड विधायक विश्वास सारंग के निर्वाचन क्षेत्र में आता है जो मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री हैं। खैर वार्ड कार्यालय की बदहाली देख के मैं अपने घर का हाल भूल गया।
प्री मानसूनी हलचल के साथ विकास पर सनक सवार हो गई
कुछ समय पहले तक यहां कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन प्री मानसूनी हलचल के साथ विकास पर सनक सवार हो गई.. बड़वाई में मेरा घर पक्की सड़क से थोड़ा अंदर गिट्टी और मुरम की कच्ची सड़क पर पड़ता है। करीब चौंतीस साल से यह कच्ची सड़क, पक्की सड़क से कहीं बेहतर तरीके से संपर्क जोड़े हुए थी। इस साल बारिश बाद में शुरू हुई पानी की हलचल पहले शुरू हो गई। जेसीबी ने गढ्ढे खोदकर पाइप लाइन बिछाना शुरू कर दिया। खुशी हुई कि घर में नल लगेगा, पानी आएगा। इसके साथ ही चिंता भी बढ़ गई कि अबकी बार बारिश के पानी के साथ कीचड़ भी खूब होगी।
पार्षद का आश्वासन बारिश के पानी में फिसल गया
मैंने वार्ड 75 में अपनी निर्वाचित पार्षद श्रीमती रीता विश्वकर्मा और उनके पति अगले चुनाव के लिए पार्षद पद के प्रबल दावेदार जगदीश विश्वकर्मा से मिलकर अपनी चिंता से अवगत करा दिया। आश्वासन मिला लेकिन बारिश के साथ फिसलन बढ़ती गई। आज आवाजाही में आ रही परेशानी दिखाने के लिए सड़क के कुछ फोटो खींचकर वार्ड कार्यालय गया था लेकिन वहां का हाल देखा तो अपनी दिक्कत भूल गया।
पोस्ट के साथ प्रदर्शित फोटो वार्ड कार्यालय के पहुंच मार्ग के साथ ही वार्ड कार्यालय और उसके नजदीक स्थित स्कूल के हैं। पार्षद और उनके पति एक दिन छोड़कर कार्यालय आते हैं, दिखता तो उनको भी होगा, अपना बता के क्या फायदा। इतना ही कहेंगे यदि सुधारना इतना कठिन था तो पानी के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम, पानी का मौसम निकल जाने के बाद कराना था।




