भोपाल, 21 जून 2026: स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई शिक्षक स्थानांतरण नीति को लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। 'समग्र शिक्षक संघ' ने इस नीति को पूरी तरह अव्यावहारिक और शिक्षकों के हितों के विरुद्ध बताते हुए शासन को पत्र लिखकर इसे तत्काल संशोधित करने की मांग की है।
Madhya Pradesh Teacher Transfer Policy Faces Criticism Over 'Impractical' Provisions
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेशचंद्र दुबे का कहना है कि विभाग द्वारा थोपे गए कड़े एवं अव्यवहारिक नियमों के कारण लगभग 95% शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। नीति में शामिल 90% ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता सबसे बड़ी बाधा बन गई है। स्थिति यह है कि जिन शिक्षकों ने नियमानुसार ई-अटेंडेंस दर्ज की है, पोर्टल उन्हें भी 90% से कम उपस्थिति का हवाला देकर अपात्र घोषित कर रहा है। विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क की गंभीर समस्या के कारण शिक्षक तकनीक की विफलता का शिकार हो रहे हैं।
समग्र शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री संजय तिवारी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि नीतिगत नियम बनाने का अधिकार सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का है। सामान्य विभाग यदि किसी विभाग की विभागीय संरचना के अनुसार प्रावधान जोड़ने का अधिकार देता है तो पॉलिसी के मुख्य प्रावधानों को कोई विभाग नहीं छेड़ सकता। GAD की स्थानांतरण नीति में ई-अटेंडेंस की कोई अनिवार्यता नहीं है, ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इसे शिक्षकों पर थोपना पूरी तरह गैर वैधानिक है।
पोर्टल की तकनीकी खामियों से बढ़ रही मुसीबत
संघ के मीडिया प्रभारी और प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिंह पंवार ने विभागीय पोर्टल के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं, उनका आरोप है कि स्कूल शिक्षा और जनजातीय विभाग के पोर्टल को सही ढंग से अपडेट ही नहीं किया गया है। इसका नतीजा यह है कि पोर्टल पर दिवंगत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम भी प्रदर्शित हो रहे हैं, भरे हुए पद रिक्त दिखाए जा रहे हैं, जबकि कई स्कूलों में वास्तविक रिक्त पद पोर्टल पर गायब हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण योग्य शिक्षक मनचाहे स्थान के लिए आवेदन करने से वंचित रह गए हैं।
समग्र शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें:
ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो: स्थानांतरण नियमों से 90% ई-अटेंडेंस की शर्त को तत्काल हटाया जाए।
पोर्टल का सुधार: डेटा को तुरंत अपडेट किया जाए ताकि वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी शिक्षकों को मिल सके।
जनगणना ड्यूटी में छूट: जनगणना जैसे अनिवार्य सरकारी कार्यों में लगे शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर न रखा जाए, विशेषकर ब्लॉक के भीतर के तबादलों में यह शर्त पूरी तरह औचित्यहीन है।
व्यावहारिक नीति और नया टाइम-टेबल: स्वैच्छिक स्थानांतरण के नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, साथ ही संशोधन नियम जारी कर आवेदन के लिए नया टाइम-टेबल घोषित किया जाए।
संघ ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि इन विसंगतियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो संगठन स्थानांतरण नीति के अव्यवहारिक नियमों को उच्च न्यायालय में चुनौती देगा।

.webp)