भोपाल, 20 जून 2026: मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग ने राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए e-Departmental Provident Fund (e-DPF) प्रणाली का क्रियान्वयन और ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
MP Government e-DPF Implementation News and Online Process
वर्तमान में, विभागीय भविष्य निधि (DPF) के अभिदाताओं के प्रकरणों का निराकरण 'सामान्य भविष्य निधि नियम, 1955' के अनुसार संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) के स्तर से किया जाता है। लेकिन अब, प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए MP Govt GPF online payment rules के तहत पूरी प्रक्रिया को कोषालयीन कम्प्यूटर प्रणाली यानी IFMIS (Integrated Financial Management Information System) के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में ऑनलाइन प्राधिकार पत्र (Authorization Letter) जारी करने से लेकर भुगतान तक की समस्त कार्यवाही संचालक, पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा, मध्य प्रदेश द्वारा की जाएगी।
How to Apply for GPF Final Payment Online through ESS Module
इस नई डिजिटल व्यवस्था में कर्मचारियों यानी अभिदाताओं (Subscribers) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कर्मचारियों को अब Employee Self Service (ESS) login for GPF का उपयोग करके अपने वेतन से प्रति माह होने वाली कटौतियों और शासन द्वारा देय ब्याज का ऑनलाइन अवलोकन करना होगा। यदि कोई विसंगति (discrepancy) दिखाई देती है, तो उन्हें सकारण अभ्यावेदन अपने DDO को देना होगा। Online GPF application process for retired employees के अनुसार, सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व कर्मचारी को भविष्य निधि अंशदान बंद करना होगा और IFMIS के ESS मॉड्यूल में अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के दौरान प्राप्त OTP और सिस्टम जनरेटेड ID को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी कर्मचारी की ही होगी।
DDO Responsibilities in GPF Final Payment and IFMIS Portal Updates
आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के लिए भी नए निर्देश जारी किए गए हैं। DDO responsibilities in GPF final payment के तहत, उन्हें कर्मचारी द्वारा ऑनलाइन आवेदन में दिए गए तथ्यों का मिलान विभाग की निधि पासबुक और सेवा पुस्तिका (Service Book) से करना होगा। इसके बाद, पासबुक के सत्यापित पृष्ठों को स्कैन करके IFMIS portal for MP government employees पर अपलोड करना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी के विवरण में कोई 'मिसिंग क्रेडिट' या विसंगति है, तो उसमें सुधार कर प्रकरण को सेवानिवृत्ति दिनांक से कम से कम एक माह पूर्व ऑनलाइन अग्रेषित (forward) करना सुनिश्चित करना होगा।
Direct Bank Transfer of GPF Amount and Directorate of Pension Process
संचालनालय स्तर पर, DDO से प्राप्त ऑनलाइन प्रकरणों और डिजिटल अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। पासबुक में अंकित ब्याज और शेष राशि का मिलान IFMIS डेटाबेस से किया जाएगा। सब कुछ सही पाए जाने पर Directorate of Pension and Provident Fund Bhopal द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्राधिकार पत्र ऑनलाइन जारी किया जाएगा। इसके बाद, भुगतान की राशि सीधे कर्मचारी के उस बैंक खाते में Direct Bank Transfer (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी, जिसमें सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर 06 माह का वेतन जमा किया गया हो। प्राधिकार पत्र जारी होने के बाद यदि कोई विसंगति मिलती है, तो निराकरण के उपरांत अवशेष प्राधिकार पत्र (Residual Authorization) जारी करने की सुविधा भी दी गई है।
GPF Payment Rules for Nominee in Case of Employee Death during Service
यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो GPF payment rules for nominee in case of employee death के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। कार्यालय का 'Verifier' सबसे पहले कर्मचारी की ई-प्रोफाइल (ESS) में नामांकित व्यक्ति (Nominee) के विवरण (नाम, जन्मतिथि, बैंक खाता) का सत्यापन करेगा। यदि विवरण अपूर्ण है, तो परिवार के सदस्यों से जानकारी प्राप्त कर उसे अपडेट किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु (Minor) होने की स्थिति में भुगतान वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में किया जाएगा। यदि ई-प्राधिकार पत्र जारी होने के बाद और भुगतान से पहले कर्मचारी की मृत्यु होती है, तो पुराने प्राधिकार पत्र को निरस्त कर नामांकित व्यक्ति के पक्ष में नया संशोधित ई-प्राधिकार पत्र जारी किया जाएगा।
Important Deadline for Online e-Authorization Letters in MP Government
मध्य प्रदेश शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि जमा शेष के लिए केवल ऑनलाइन प्राधिकार पत्र ही मान्य होंगे। इस तिथि के बाद मैन्युअल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाएगा। ई-प्राधिकार पत्र जारी होने के दिनांक से 06 माह की अवधि के लिए ही वैध रहेगा। यदि किन्हीं अपरिहार्य परिस्थितियों में इस अवधि में भुगतान संभव न हो, तो सकारण प्रस्ताव प्रस्तुत कर नवीन प्राधिकार पत्र प्राप्त करना होगा। शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि 1 जुलाई 2026 के उपरांत किसी भी प्रकार का संशोधन केवल प्रमाणित साक्ष्यों और विभागाध्यक्ष की अनुशंसा पर ही किया जा सकेगा। यह क्रांतिकारी बदलाव मध्य प्रदेश सामान्य भविष्य निधि भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।

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