भारत में आंगनवाड़ी केंद्रों को 'स्मार्ट पोषण हब' के रूप में अपग्रेड किया जाएगा

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 17 जून 2026:
शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट और सिफारिश प्रस्तुत कर दी है। इसमें (विशेष रूप से 379वीं और 381वीं रिपोर्ट में) कुपोषण को दूर करने के लिए कई बड़े सुझाव दिए गए हैं। सरकार यदि इन सुझावों पर अमल करती है तो आंगनवाड़ी केंद्रों को 'स्मार्ट पोषण हब' के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। 

कुपोषण के संबंध में रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु विस्तार से दिए गए हैं:

1. कुपोषण और एनीमिया की वर्तमान स्थिति (डेटा)
ठिगनापन (Stunting): राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 4 और 5) के अनुसार बच्चों (0-5 वर्ष) में ठिगनापन क्रमशः 38.4% और 35.5% था। हालांकि, पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) के जनवरी 2025 के डेटा के अनुसार, यह बढ़कर 39.61% हो गया है। मंत्रालय का तर्क है कि अप्रैल 2025 तक यह दर 36.00% है, जो एक बड़े सैंपल साइज पर आधारित है।
एनीमिया (Anaemia): 15-19 वर्ष की किशोरियों में एनीमिया की व्यापकता NFHS 4 के 54.1% से बढ़कर NFHS 5 में 59.1% हो गई है।
अति कुपोषित बच्चे: रिपोर्ट में गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण सहायता की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

2. कुपोषण मिटाने के लिए समिति की प्रमुख सिफारिशें
समिति ने कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को "मिशन मोड" में चलाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
राष्ट्रीय मिशन की स्थापना: समिति ने मांग की है कि 2032 तक "कुपोषण और एनीमिया मुक्त भारत" का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए, जिसमें महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त मंत्रालय मिलकर काम करें।
नाश्ता और दूध का प्रावधान: बच्चों में सुबह की भूख मिटाने और संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार के लिए एक राष्ट्रीय नाश्ता कार्यक्रम (National Breakfast Program) शुरू करने और प्रतिदिन एक गिलास दूध सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
AI और तकनीक का उपयोग: बच्चों के विकास के पैटर्न को ट्रैक करने और कुपोषण के जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने के लिए AI-आधारित विकास निगरानी प्रणाली और डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड लागू करने का सुझाव दिया गया है।
Socio-Geo Caste Census: समिति ने उन विशिष्ट समुदायों और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक सामाजिक-भौगोलिक जाति जनगणना कराने की सिफारिश की है जहाँ कुपोषण और एनीमिया की दर बहुत अधिक है।
लागत मानदंडों में संशोधन: पूरक पोषण के लिए प्रति दिन प्रति लाभार्थी दरों को खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति (Food Price Inflation) से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।

3. सरकारी तंत्र और प्रोटोकॉल
रिपोर्ट में वर्तमान में चल रहे प्रयासों और प्रोटोकॉल का भी उल्लेख है:
CMAM प्रोटोकॉल: कुपोषित बच्चों की पहचान और प्रबंधन के लिए "Community Management of Malnutrition" प्रोटोकॉल स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर जारी किया गया है।
एनीमिया मुक्त भारत (AMB): एनीमिया को कम करने के लिए 6x6x6 रणनीति अपनाई जा रही है, जो छह लक्षित समूहों (बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक) पर ध्यान केंद्रित करती है।
फोर्टिफाइड चावल: सूक्ष्म पोषक तत्वों (आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B-12) की कमी को दूर करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल का वितरण किया जा रहा है।
पोषण ट्रैकर: इसे वैश्विक स्तर पर मोबाइल फोन आधारित सबसे बड़ी पोषण निगरानी प्रणाली बताया गया है, जो रीयल-टाइम डेटा कैप्चर करती है।

4. कुपोषण मिटाने के लिए क्या करना होगा
समिति ने स्पष्ट किया है कि कुपोषण केवल भोजन खाने से दूर नहीं होगा। इसके लिए भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और सुरक्षित पेयजल का समन्वित होना आवश्यक है। रिपोर्ट में आंगनवाड़ी केंद्रों को 'स्मार्ट पोषण हब' के रूप में अपग्रेड करने और समुदाय के नेतृत्व वाली 'पोषण रसोई' (Nutrition Kitchens) स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है। 
Tags

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!