BHOPAL से हर महीने 60 Gen Z लड़कियां, सपनों की दुनिया में जाने के लिए घर छोड़ देती हैं

Updesh Awasthee
भोपाल, 18 जून 2026:
Gen Z ने दुनिया भर में आफत मचा रखी है। इनका नजरिया और लाइफ के महत्वपूर्ण मुद्दे, सामान्य तौर पर अपने पेरेंट्स से बिल्कुल अलग होते हैं। लेटेस्ट पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भोपाल से हर महीने 60 Gen Z लड़कियां अपना घर छोड़ देती हैं। इनमें 90% से ज्यादा मामले ऐसे हैं जिसमें लड़कियां अपनी कल्पना की दुनिया में जाने के लिए घर छोड़ देती हैं। मतलब इसमें उनके साथ कोई लड़का या पुरुष होता है, लेकिन उसके साथ जीवन बिताना लक्ष्य नहीं होता। घर छोड़ने का मुख्य कारण होता है, अपने तरीके से जिंदगी जीने की आजादी।

12 से 17 की उम्र में होता है टकराव

भारतीय कानून व्यवस्था के तहत यदि कोई नाबालिग लड़की घर से गायब हो जाती है तो पुलिस को ऐसे मामलों को अपहरण के तहत दर्ज करके इन्वेस्टिगेट करना होता है। भोपाल में हर साल औसत 600 मामले दर्ज हो रहे हैं। 2026 में 1 जनवरी से 16 जून तक 316 मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस की इन्वेस्टीगेशन में पाया गया है कि 12 से 17 वर्ष उम्र की जितनी भी लड़कियां अचानक घर से गायब हुई हैं, वह सभी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थी। घर वालों को पता ही नहीं चला कि मोबाइल लेकर बैठी हुई लड़की के मन में क्या चल रहा है। दरअसल 12 वर्ष की उम्र तक बच्चों के लिए पेरेंट्स और टीचर ही उनकी नॉलेज का एकमात्र सोर्स होते हैं। इसके बाद जब वह सोशल मीडिया के जरिए दुनिया देखना शुरू करते हैं तो, उनका नजरिया बदल जाता है। वह अपने पेरेंट्स और टीचर को जज करने लगते हैं। तुलनात्मक अध्ययन करने लगते हैं। एकांत और आजादी पसंद करते हैं जबकि इसी उम्र में पेरेंट्स और टीचर, करियर बनाने के लिए प्रेशर करने लगते हैं। 

प्यार नहीं, बिना जिम्मेदारी वाली आजादी के लिए

नियम के अनुसार लापता होने वाली लड़कियों के मामले अपहरण के तहत दर्ज तो किया जा रहे हैं लेकिन इन्वेस्टिगेशन में पाया जा रहा है की लड़कियों का अपहरण नहीं हो रहा है, वह सोशल मीडिया के कारण भ्रम का शिकार हुई है और अपने लिए एक अलग दुनिया की कल्पना की। अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने की आजादी के लिए घर छोड़ा। हालांकि इसमें सोशल मीडिया या कभी-कभी कोई लोकल या परिचित युवक भी शामिल रहा परंतु घर छोड़ने वाली लड़कियों का उद्देश्य, संबंधित युवक के साथ जीवन व्यतीत करना नहीं था बल्कि करियर के लिए टीचर और परिवार के प्रेशर से दूर आजादी से, अपने तरीके से अपनी जिंदगी जीना था। मजे की बात तो यह है कि इनमें से कुछ लड़कियों का मानना यह भी था कि जो युवक उनका साथ लेकर जा रहा है, वही घर की सभी जिम्मेदारी भी संभालेगा।

60 Gen Z Girls Leave Home Every Month in Bhopal, What's Driving This Trend?

इस प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए हमने AI को काम पर लगाया और उसने सोशल मीडिया एवं विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर निष्कर्ष के रूप में हमको बताया कि:- 
Gen Z की सहनशक्ति बहुत कम है। छोटी-सी बात (जैसे पढ़ाई में फेल होना, मोबाइल/इंटरनेट पर पाबंदी, परिवार से बहस, या दोस्तों से मिलने की मनाही) पर बच्चे/लड़कियां घर छोड़कर भाग जाती हैं।
Gen Z स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है। वे जल्दी इन्फ्लुएंसर्स, रोमांटिक रिलेशनशिप या "आजादी" के सपने देखते हैं। ऑनलाइन दोस्त/पार्टनर से मिलने या "नई जिंदगी" शुरू करने के चक्कर में घर छोड़ देते हैं।
माता-पिता पारंपरिक सोच (शादी, पढ़ाई, संस्कार) रखते हैं, जबकि Gen Z स्वतंत्रता, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत चुनाव चाहती है। अकेलापन, पढ़ाई का दबाव, या भावनात्मक समर्थन की कमी से लड़कियां बाहर की "आकर्षक" दुनिया की तरफ जाती हैं।

मतलब यह केवल भोपाल की कहानी नहीं है, पूरे भारत की यही कहानी है। विधानसभा में पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश राज्य में पिछले 4 साल में 47,000+ लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज की गई है, जिनमें बड़ा हिस्सा Gen Z का। 

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