भोपाल समाचार, 16 अप्रैल 2026: कक्षा 12 में पढ़ने वाली लड़कियां जब घर में अकेली होती हैं तो क्या करती हैं। इस प्रश्न के सामने सबका अपना जवाब हो सकता है लेकिन भोपाल की चांदनी जो करती थी, यह बात पक्की है कि किसी और ने नहीं किया। तभी तो आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी, चांदनी के साथ अपना फोटो क्लिक करवा रहे हैं।
Bhopal Story: What Happened When Chandni Was Alone at Home?
यह कहानी है चांदनी विश्वकर्मा की, जिसने माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं बोर्ड परीक्षा में पूरे मध्य प्रदेश में टॉप करके इतिहास रच दिया है। कॉमर्स जैसे सब्जेक्ट में 500 में से 494 अंक प्राप्त करना कोई आसान काम नहीं है। चांदनी ने बड़ी ईमानदारी के साथ अपनी सफलता का राज बता दिया है। चांदनी का यह फार्मूला उसके सभी जूनियर्स के लिए सबसे बड़ा सफलता मंत्र हो सकता है। आप तो जानते ही हैं की चांदनी के पिता मजदूर और चांदनी की माता स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने का काम करती हैं। इसके बाद भी माता-पिता ने चांदनी को प्राइवेट स्कूल में एडमिशन दिलाया, कोचिंग भी लगाई, लेकिन उसके टॉप करने का राज उसका स्कूल या कोचिंग सेंटर नहीं है बल्कि एक ऐसा फार्मूला है, इसके बारे में सबको पता तो है लेकिन कोई अप्लाई नहीं कर पाता।
चांदनी ने बताया कि जब, माता-पिता चले जाते थे और वह घर में अकेली होती थी, तब ज्यादा फोकस के साथ पढ़ाई कर पाती थी। वह इंतजार करती थी, कब घर खाली हो और वह अपनी किताबों में खो जाए। चांदनी ने कोई ग्रुप स्टडी नहीं की। वह केवल अपने डाउट क्लियर करने के लिए कोचिंग जाती थी। स्कूल के बाद कोचिंग सेंटर उसके लिए सेकंड ऑपिनियन सेंटर था। मूल रूप से पढ़ाई अपने घर पर ही कर रही थी। चांदनी ने बताया कि उसने 11वीं का रिजल्ट आने के बाद ही 12वीं की पढ़ाई शुरू कर दी थी। रात-रात भर जाग कर पढ़ाई नहीं की बल्कि पूरे साल हर रोज नियमित रूप से पढ़ाई की और जब परीक्षा आई तो वह पूरी तरह से कॉन्फिडेंट थी। उसे मालूम था की मेरिट में उसका नाम पक्का है।
अब जूनियर्स को डिसाइड करना है कि, जब घर में वह अकेले होते हैं तो उनको क्या करना है।

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