भोपाल समाचार, 4 अप्रैल 2026: भारत में कोई भी कॉलेज, एक यूनिवर्सिटी द्वारा बनाए नियमों के अधीन काम करता है; यूनिवर्सिटी, UGC के नियमों का पालन करती है और UGC, संसद द्वारा निर्धारित संविधान के अधीन होती है लेकिन हेड ऑफ द डिपार्टमेंट की पोस्ट पर बैठा प्रोफेसर, खुद कानून बनता है और लागू कर देता है। मध्य प्रदेश की एक सरकारी यूनिवर्सिटी में HOD ने कई विद्यार्थियों को इसलिए परीक्षा देने से रोक दिया क्योंकि वह एक इवेंट में उपस्थित नहीं हुए थे।
Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya University, Satna, MP Controversy
यह मामला Mahatma Gandhi Chitrakoot Gramodaya Vishwavidyalaya का है। हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट का नाम है डॉ सीपी गूजर। एक हस्तलिखित आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पर प्रोफेसर साहब के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा है कि आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा में सभी छात्रों को चित्रकूट गौरव दिवस में विश्वविद्यालय को आवंटित दीप प्रज्वलन लक्ष्य की पूर्ति हेतु अनिवार्यतः दिनांक 27 मार्च 2026 को दोपहर 4:30 बजे संकाय में उपस्थित होने की सूचना दी गई थी और यह भी निर्देश दिया गया था कि जो छात्र अनुपस्थित होंगे वह 28 मार्च को होने वाली मौखिक परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे।
इसके बावजूद अधिकांश छात्रों ने उक्त सूचना व निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया है अतः हुए आज 28 मार्च को मौखिक परीक्षा में नहीं बैठेंगे। अनुपस्थित छात्रों को ₹500 का अर्थ दंड विश्वविद्यालय खाते में जमा करना होगा तभी वह 2 अप्रैल 2026 को मौखिक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
यह आदेश अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और तमाम कॉलेज स्टूडेंट्स यह सवाल कर रहे हैं कि क्या परीक्षा में शामिल होने के लिए किसी इवेंट में शामिल होना जरूरी है। क्या कोई प्रोफेसर, इस तरह का नियम बना सकता है। क्या हेड ऑफ द डिपार्टमेंट के पास इस प्रकार का कोई आदेश जारी की तरह का अधिकार है। यदि है तो किस नियम के अंतर्गत और यदि नहीं तो ऐसे प्रोफेसर को तुरंत प्रभाव से पद से हटा देना चाहिए।

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