भोपाल, 6 अप्रैल 2026: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है क्या अतिथि शिक्षकों को Boss का संरक्षण मिल गया है। अब Boss सब कुछ सही कर देंगे। विधायक महोदय का नाम श्री दिनेश जैन है। अपने ही खुमार में रहते हैं इसलिए अपने नाम के साथ Boss लगाते हैं, @DineshJainBoss. डॉक्यूमेंट के हिसाब से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त है लेकिन इस बातचीत को ध्यान से सुनिए। आपको बहुत कुछ समझ में आएगा।
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) April 6, 2026पॉलिटिकल गॉसिप छोड़कर रिकॉर्ड पर बात करते हैं। विधायक जी ने कहा कि वह मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। पता करते हैं कि इससे पहले विधानसभा में कितने मुद्दे उठाए:-
Reality Check for MLA Claiming to Be ‘Boss’ of Guest Teachers
हाल ही में (फरवरी 2026 में) मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र संपन्न हुआ है। बजट सत्र देश और प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। सभी विधायक अपने क्षेत्र के विकास के लिए बजट मांगते हैं। सरकार प्रावधान करती है। यदि विधायक के क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए संतोषजनक बजट नहीं मिलता तो वह सवाल उठता है। यह एक ऐसा सत्र होता है जिसमें स्पष्ट रूप से दिखाई दे जाता है कि कितने विधायक सक्रिय हैं और कितने विधायकों को क्षेत्र के विकास और जनता से कोई मतलब नहीं है। विधानसभा में सक्रियता ही विधायक का रिपोर्ट कार्ड होता है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मध्य प्रदेश बजट 2026-27 सत्र में महिदपुर के विधायक श्री दिनेश जैन ने एक भी सवाल नहीं उठाया। कांग्रेस पार्टी द्वारा जितने भी प्रदर्शन किए गए, श्री दिनेश जैन भीड़ में एक व्यक्ति के तौर पर शामिल रहे। अपने क्षेत्र में खुद को Boss कहते हैं, लेकिन जब जनता के लिए आवाज उठाने का मौका आता है तो सबसे पीछे चले जाते हैं।
मोरल ऑफ द न्यूज़
इस समाचार को प्रकाशित करने का तात्पर्य केवल इतना सा है कि महिदपुर की जनता को पता चलना चाहिए, उनका विधायक कितना सक्रिय है। यदि कोई क्रिकेट प्लेयर घरेलू मैदान में कितना भी अच्छा खेल है लेकिन टूर्नामेंट के समय जीरो पर आउट होकर वापस आ जाए तो उसे क्या कहेंगे। विधायक का काम होता है विधानसभा में जनता की समस्याओं को उठाना और क्षेत्र के लिए ज्यादा से ज्यादा बजट लेकर आना। सरकारी और प्राइवेट इवेंट्स में चीफ गेस्ट बनने के लिए कोई विधायक नहीं चुनता।
इस समाचार के माध्यम से अतिथि शिक्षकों को यह भी समझाना है कि, सिंधिया-शिवराज से लेकर दिनेश जैन तक सबकी ठगी का शिकार होने की जरूरत नहीं है। जो आपकी प्रॉब्लम को समझ नहीं पा रहा है, वह सॉल्व कैसे करेगा। अतिथि शिक्षकों को अपने पैरों पर खड़े होने की जरूरत है। इसका मतलब यह नहीं है कि जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन ही ना दिया जाए या फिर उनसे समर्थन ही ना मांगा जाए। इसका मतलब यह है कि उनके भरोसे नहीं रहा जाए। ऐसे नेता केवल आपका समर्थन कर सकते हैं, नेतृत्व नहीं कर सकते। नेतृत्व तो आपको खुद करना पड़ेगा। महाराज हो या शिवराज, आपके लिए न्याय लेकर कोई नहीं आएगा।

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