इंदौर, 16 अप्रैल 2026: शाहिद मध्य प्रदेश में यह पहली बार है जब वंदे मातरम गाने से इनकार करने वाले किसी मुस्लिम नेता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया हो। इंदौर नगर निगम की दोनों महिला पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इससे पहले पुलिस ने उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बुलाया था।
Indore FIR Over Vande Mataram Row
नगर निगम के बजट सत्र में राष्ट्रगीत गाने से इनकार करने के मामले में एमजी रोड पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षद-रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम-के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई भाजपा पार्षदों की शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर की है। दोनों पार्षदों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां उनसे करीब साढ़े चार घंटे तक सवाल-जवाब किए गए।
एसीपी विनोद दीक्षित के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच की गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई। एमजी रोड थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और 3(5) (समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और सद्भाव बिगाड़ने) के तहत मामला दर्ज किया है।
बजट सत्र में गाने को लेकर विवाद हुआ था
8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाने को लेकर विवाद हुआ था। फौजिया शेख अलीम ने सभापति से वह नियम या एक्ट दिखाने को कहा, जिसमें इसे अनिवार्य बताया गया हो, कुछ देर बाद वे सदन से बाहर चली गईं। वहीं, रुबीना इकबाल खान के एक बयान से माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
दोनों पार्षदों ने अपने रुख को सही ठहराया। रुबीना ने धर्म का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में इसकी अनुमति नहीं है, हालांकि उन्होंने अपने विवादित बयान पर माफी मांगी।
एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ
बजट वाले दिन सभापति के निर्देश पर कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने कहा था कि उन्हें वह एक्ट दिखाया जाए, जिसमें ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य बताया गया हो। कुछ देर बाद वे खुद ही सदन से बाहर चली गईं। वहीं, रुबीना इकबाल खान ने कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ। उनके इस प्रकार की चुनौती पूर्ण बयान से सदन संवेदनशील हो गया था।
समाचार का सार
पुलिस थाने में दोनों महिला नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा इसलिए दर्ज नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया था, बल्कि उन्होंने एक योजना के तहत तनाव की स्थिति पैदा करने के लिए बजट सत्र में इस मुद्दे को उठाया। सरकार ने एक सर्कुलर के जरिए, वंदे मातरम को अनिवार्य करने के निर्देश दिए और नगर निगम इंदौर ने इसको स्वीकार किया है। इसलिए नगर निगम के सत्र में लागू किया गया। यदि स्वीकार नहीं है तो अनुपस्थित हो सकते हैं, देरी से आ सकते हैं। सदन के भीतर और फिर मीडिया के सामने सदन के बाहर हंगामा करना, इस प्रकार की गतिविधियों को अपराध माना गया है।

.webp)