Fact Check - उज्जैन-इंदौर हाईवे पर प्लास्टिक का सरिया VIRAL VIDEO से सरकार को फायदा हो गया

Updesh Awasthee
उज्जैन, 17 मार्च 2026
: सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस बात को प्रमाणित कर दिया कि उज्जैन सिंहस्थ के लिए तैयार किया जा रहे उज्जैन-इंदौर हाईवे पर सड़क के किनारे बन रहे ड्रेन के कंस्ट्रक्शन का काम बेस्ट क्वालिटी और अत्याधुनिक तकनीक के साथ किया जा रहा है। जो कई सालों तक खराब नहीं होगा। वीडियो में जी सरिया को प्लास्टिक का सरिया बताया जा रहा है असल में जीएफआरपी का सरिया है और लोहे से ज्यादा महंगा होता है। इसके फैक्ट चेक के दौरान हमने केवल सरकारी अधिकारियों के बयान पर भरोसा नहीं किया बल्कि AI और कंस्ट्रक्शन लाइन के प्राइवेट विशेषज्ञों के एक्सपीरियंस को भी शामिल किया है। 

जीएफआरपी का सरिया क्या होता है

जीएफआरपी का फुल फॉर्म Glass Fiber Reinforced Polymer है। जीएफआरपी (GFRP) सरिया मुख्य रूप से Pultrusion प्रक्रिया से बनाया जाता है। यह एक निरंतर (continuous) और स्वचालित उत्पादन विधि है, जो फाइबर और रेजिन को मिलाकर मजबूत, हल्के और जंग-प्रतिरोधी सरिया तैयार करती है। यह प्रक्रिया स्टील सरिया की तरह हाई टेम्परेचर हीटिंग या फोर्जिंग नहीं होती, बल्कि रासायनिक हार्डनिंग (curing) पर आधारित है।

GFRP सरिया के Raw Materials की खास बातें

ग्लास फाइबर (Glass Fiber Rovings): मुख्य मजबूती देने वाला हिस्सा (60-80% तक वॉल्यूम)। ये महीन धागों के रूप में आते हैं।
रेजिन (Thermosetting Resin): आमतौर पर Vinyl Ester, Epoxy या Polyester रेजिन, जो फाइबर को बांधती है और जंग से बचाती है।
अन्य: हार्डनर (catalyst), fillers, और कभी-कभी सैंड कोटिंग (कंक्रीट से बेहतर बॉन्डिंग के लिए)।
GFRP सरिया का वजन स्टील से 1/4 होता है, tensile strength ज्यादा (800-1200 MPa), और जंग बिल्कुल नहीं लगती। भारत में कंपनियां जैसे Jivial Composites, Titan Technovators, Get FiBAR आदि इसी pultrusion तकनीक से बनाती हैं।

GFRP सरिया स्टील से मजबूत क्यों होता है 

मुख्य रूप से tensile strength (खिंचाव सहने की ताकत) में यह स्टील से काफी बेहतर होता है, और जंग न लगने से कुल संरचना की लंबी उम्र और मजबूती बढ़ जाती है। GFRP सरिया की tensile strength आमतौर पर 800-1200 MPa (कुछ मामलों में 1500 MPa तक) होती है। जबकि स्टील सरिया (TMT या mild steel) की tensile strength 400-600 MPa (या 450-690 MPa) के आसपास रहती है। इसीलिए कहा जाता है कि GFRP सरिया, स्टील या लोहे के सरिया से 2 गुना या उससे ज्यादा खिंचाव सह सकता है। यानी ज्यादा तनाव वाली स्थितियों में (जैसे पुल, समुद्री संरचना, या लंबे स्पैन) GFRP बेहतर प्रदर्शन करता है। 

कई रिपोर्ट्स में GFRP को "long-term strength" में स्टील से बेहतर बताया गया है, क्योंकि स्टील की जंग से tensile capacity समय के साथ घट जाती है, जबकि GFRP स्थिर रहता है।

GFRP का कंक्रीट से बॉन्ड स्टील से 2-3 गुना बेहतर होता है। इसके कारण क्रैक कम होते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं GFRP सरिया, लोहे के सरिया की तुलना में 20 गुना ज्यादा लोड साइकिल (420,000 vs स्टील के 23,000) सह सकता है। इसलिए पल अथवा ऐसे प्रत्येक कंस्ट्रक्शन में जहां ट्रैफिक या किसी मशीन के कारण लगातार वाइब्रेशन होता है, GFRP कुछ सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। 

केमिकल प्लांट, अस्पताल, या इलेक्ट्रिकल क्षेत्रों में स्टील से बेहतर प्रदर्शन करता है क्योंकि किसी भी प्रकार के केमिकल अथवा इलेक्ट्रिकल झटका का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

Aaj Tak, Jivial Composites, RebarX.in की रिपोर्ट्स में GFRP को स्टील से 2 गुना मजबूत, 4 गुना हल्का, जंग-फ्री और लंबे समय में सस्ता बताया जा रहा है। खासकर coastal areas, bridges, metro, wastewater plants में यह तेजी से अपनाया जा रहा है। 

इंजीनियरों की बात नहीं मानना तो वैज्ञानिकों की रिसर्च रिपोर्ट पढ़िए 

PMC जर्नल (2020): चार अलग-अलग निर्माताओं के GFRP बार्स पर tensile टेस्टिंग की गई। परिणाम: GFRP की tensile strength विभिन्न मानकों (जैसे ASTM, ISO) के अनुसार 700-1400 MPa तक थी, जो स्टील की सामान्य रेंज (450-690 MPa) से ज्यादा है। अध्ययन ने सुझाव दिया कि GFRP को विभिन्न व्यास में टेस्ट करके निर्माण में इस्तेमाल करें। 

IIETA जर्नल (2024): GFRP और स्टील के बॉन्डिंग पर तुलनात्मक अध्ययन किया गया। GFRP को कुछ विशेष प्रकार की संरचनाओं में स्टील की तुलना में बेहतर विकल्प बताया गया, क्योंकि इसकी tensile strength और corrosion resistance बेहतर है, हालांकि crack prediction में डिजाइन बदलाव की जरूरत है। 

MDPI जर्नल (2024): जीवन-चक्र मूल्यांकन (Life-Cycle Assessment) में GFRP को स्टील से पर्यावरण-अनुकूल और लंबे समय तक मजबूत बताया गया। अध्ययन ने कहा कि GFRP की tensile properties इसे procurement (खरीद) में सस्टेनेबल विकल्प बनाती हैं। 

GFRP सरिया यदि इतना ही मजबूत है तो हाथ से टूट कैसे गया?

जैसा कि अपने ऊपर पढ़ लिया है लेकिन ध्यान नहीं दिया होगा, GFRP सरिया को अधिकतम खिंचाव सहन करने के लिए बनाया गया है। यदि आप इसको मोड़ने की कोशिश करेंगे तो यह आसानी से टूट जाएगा क्योंकि यह सरिया मोड़ने के लिए बनाया ही नहीं जाता। जहां पर सरिया मोड़ने की जरूरत होती है वहां पर स्टील का सरिया उपयोग किया जाता है। 

GFRP सरिया और लोहे के सरिया की कीमत में क्या अंतर है

भारत में GFRP सरिया (फाइबर/ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड) औसतन ₹150 से ₹300 प्रति किलो मिलता है जबकि स्टील/TMT सरिया (लोहे का) औसतन ₹50 से ₹70 प्रति किलो। लोहे के सरिया के समान GFRP सरिया की बाजार में सामान्य उपलब्धता नहीं है। इसलिए GFRP सरिया खरीदने के लिए एडवांस भी देना पड़ता है जबकि TMT सरिया 3 महीने के क्रेडिट में मिल जाता है। 

वायरल वीडियो से सरकार को फायदा हो गया 

उज्जैन इंदौर हाईवे पर GFRP सरिया का वीडियो वायरल होने से पहली नजर में वह भ्रष्टाचार का मामला लगा लेकिन जब फैक्ट चेक किया गया, विशेषज्ञों से बातचीत की गई, सरकारी इंजीनियरों के दावों का परीक्षण किया गया, कई देशों में हुई रिसर्च रिपोर्ट को पढ़ा गया तो समझ में आया कि यह मामला भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि सरकार की दूरदर्शिता का है। उज्जैन सिंहस्थ मेला के लिए इस प्रकार का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है जो आने वाले 25-50 साल तक बिल्कुल ऐसा ही रहेगा। इसमें क्रैक भी नहीं आएगा।
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