भोपाल, 21 मार्च 2026: कुछ खास प्रकार के नेता, खास प्रकार की पॉलिटिक्स करते हुए यह दावा करते हैं कि खास प्रकार के नागरिकों के हितों की रक्षा केवल वही कर रहे हैं। यदि वह नहीं होते तो खास प्रकार के नागरिक आज भी प्रताड़ित हो रहे होते। लेकिन यह मामला बताता है की खास प्रकार के नेताओं को पता ही नहीं था कि उनके द्वारा संरक्षित युवक लापता हो गया है। म्यांमार में उसको बंधुआ कर्मचारी बना लिया गया। वह तो भला हो सीबीआई का जिसने एक जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया और सैकड़ो युवाओं को मुक्त करवाया।
Bhopal Youth Rescued From Bonded Labour in Myanmar, CBI Steps In Not Leaders
यह कहानी भोपाल के जितेंद्र अहिरवार की है। जितेंद्र ने कंप्यूटर में डिप्लोमा किया है। वह अपने लिए नौकरी ढूंढ रहा था तभी सोशल मीडिया के जरिए उसको पता चला कि थाइलैंड में डाटा एंट्री ऑपरेटर की जरूरत है। वेतन लगभग 40000 थाई बाथ मिलेगी। थाई बाथ, थाईलैंड की करेंसी है जैसे भारत में रुपया। 40000 थाई बाथ का मतलब हुआ लगभग 115000 रुपए। भारत में ₹25000 की नौकरी नहीं मिल रही थी, थाईलैंड में 115000 का ऑफर मिल गया। इसके साथ रहना खाना फ्री और तो और जाने का टिकट भी कंपनी की तरफ से मिलेगा।
जितेंद्र ने तत्काल अप्लाई कर दिया। टेलीग्राम के माध्यम से उसका इंटरव्यू लिया गया और जितेंद्र सेलेक्ट हो गया। जितेंद्र को लगा कि उसकी वैल्यू भारत की सरकार और भारत की कंपनियां नहीं समझती। फटाफट बैगपैक किया और एयरपोर्ट पहुंच गया। विमान में सवार हुआ और थाईलैंड पहुंच गया लेकिन यहां कहानी में एक मोड़ आया। जितेंद्र को एक टैक्सी में बिठाकर थाईलैंड से म्यांमार भेज दिया गया। म्यांमार में उसको बताया गया कि, डाटा एंट्री नहीं करनी, भारतीय लोगों के साथ साइबर ठगी करनी है। जितेंद्र ने मना किया तो जमकर पिटाई लगाई गई। खाना भी नहीं दिया। जितेंद्र को समझ में आ गया था कि वह यहां पर बंधक बना लिया गया है। इंटरनेशनल क्राइम की लैंग्वेज में इसको "साइबर स्लैब" कहते हैं।
जितेंद्र की किस्मत अच्छी थी, सीबीआई ने 30 जनवरी 2026 को अमेरिका की एफबीआई सहित ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर के साथ मिलकर मल्टीनेशनल ऑपरेशन ‘साइ-स्ट्राइक’ शुरू किया है। इस अभियान का मकसद भारत और अन्य देशों से संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय सायबर वित्तीय अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करना है। इसी दिन सीबीआई ने नई दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उप्र, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि भारत में बैठे एजेंट फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे। उन्हें डेटा एंट्री, एचआर, होटल या मर्चेंट नेवी जैसी नौकरियों के नाम पर 30-40 हजार थाई बाथ सैलरी का लालच दिया जाता था। हामी भरने पर आसान ऑनलाइन इंटरव्यू लेकर थाईलैंड बुलाया जाता, फिर बॉर्डर पार कर अवैध तरीके से म्यांमार भेजकर साइबर स्कैम कंपनियों को बेच दिया जाता, जहां बंधक बनाकर ठगी करवाई जाती थी।
म्यांमार, लाओस और कंबोडिया के सीमावर्ती इलाकों में सायबर स्कैम कंपाउंड बने हैं। यह लोग दुनिया के 30 से ज्यादा देशों में ठगी करते हैं। भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इथोपिया, फिलीपींस के युवाओं को साइबर स्लैब बनाया जाता है।
सीबीआई ने म्यांमार आर्मी को पिन पॉइंट जानकारी दी और म्यांमार आर्मी ने जितेंद्र अहिरवार सहित सभी भारतीय युवाओं को रेस्क्यू कर लिया। जितेंद्र को भोपाल भेजा गया। यहां भोपाल पुलिस ने दिसंबर में मामला दर्ज किया। एसपी प्रणय नागवंशी के मुताबिक भोपाल पुलिस को इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि, जमुई (बिहार) के 32 वर्षीय फैज अकरम द्वारा जितेंद्र अहिरवार को अपने जाल में फंसाया गया था। पुलिस ने बिहार से फैज अकरम को उठाया तो पता चला कि मेरठ उत्तर प्रदेश का रहने वाला मोहित अग्रवाल (उम्र 30 वर्ष), वेज अकरम का टीम लीडर है। मोहित को पता चल गया था कि, उसकी टीम के लोगों को पुलिस उठा रही है। मोहित फरार होने वाला था लेकिन इससे पहले पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी कर दिया और दिल्ली एयरपोर्ट से मोहित अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। रिपोर्ट: सत्येंद्र सरल।
खबर का सबक
नेताओं के पीछे भीड़ बनने से अच्छा है नियम और कानून की जानकारी पता करें। सरकारी विभागों और एजेंटीयों के बारे में जानकारी एकत्रित करें और अपने परिवार एवं अपने आसपास के लोगों को इसके बारे में बताएं। ताकि कभी कोई ऐसी स्थिति बने तो वह लोग उचित कानूनी कार्रवाई कर सकें। इसके अलावा दूसरा मैसेज तो हमेशा दिया जाता है की लालच बुरी बला है। यदि कोई आपको आपकी योग्यता और क्षमता से अधिक महत्व दे रहा है तो डाउट कीजिए क्योंकि वह आपके साथ कुछ गड़बड़ करने वाला है।

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