मध्य प्रदेश विधानसभा में पत्रकारों से लेकर पीडब्ल्यूडी तक कई बड़े मुद्दों पर गहमागहमी

Updesh Awasthee
भोपाल, 25 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही काफी गहमागहमी भरी रही। प्रश्नकाल में सहारा घोटाले, पत्रकारों की सुरक्षा और आदिवासियों के विस्थापन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा गया। (Multiple Major Issues Rock Madhya Pradesh Assembly) सदन में आवारा गौवंश की समस्या और लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

प्रश्नकाल के मुख्य आकर्षण: घोटाले और सुरक्षा

प्रश्नकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंत्रियों और विधायकों के बीच तीखी बहस हुई:
सहारा चिटफंड घोटाला: विधायक जयवर्धन सिंह ने सहारा इंडिया कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और निवेशकों की राशि की रिकवरी का मुद्दा उठाया। सरकार ने बताया कि प्रदेश के 9 लाख से अधिक निवेशकों के 6,689 करोड़ रुपये फंसे हैं, जिनमें से केवल 355 करोड़ रुपये ही अब तक वापस मिल पाए हैं।
पत्रकार सुरक्षा कानून: विधायक विपीन जैन के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया कि पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और फिलहाल इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं है।
आदिवासियों का विस्थापन: श्योपुर में आदिवासियों को वन भूमि से हटाने और उन पर कथित झूठी एफआईआर के मुद्दे पर विधायक मुकेश मल्होत्रा और मंत्री दिलीप अहिरवार के बीच नोकझोंक हुई।
न्यायाधीशों की सुरक्षा: विधायक हरिशंकर खटीक ने सभी न्यायाधीशों को गनमैन उपलब्ध कराने की मांग की, जिस पर सरकार ने कहा कि वास्तविक खतरे के आधार पर सुरक्षा दी जाती है।
अन्य मुद्दे: मुलताई में कॉलोनाइजर द्वारा धोखाधड़ी, शाजापुर में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधि का उपयोग और अनूपपुर में हवाई सेवा शुरू करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।

ध्यानाकर्षण: आवारा गौवंश और फायर सेफ्टी

• निराश्रित गौवंश की समस्या: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवारा पशुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाने और दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया। मंत्री लखन पटेल ने जवाब दिया कि सरकार 'स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु निवास) नीति 2025' पर काम कर रही है और गौवंश के भरण-पोषण के लिए अनुदान 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
फायर सेफ्टी एक्ट: विधायक अभिलाष पांडे ने शहरों में बढ़ती आगजनी की घटनाओं पर चिंता जताई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आश्वासन दिया कि केंद्र के 'मॉडल फायर एक्ट' के आधार पर मध्य प्रदेश में तीन महीने के भीतर नया कानून लाया जाएगा।

लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनुदान मांगों पर चर्चा

सदन में विभाग की 12,251 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई।
• सत्ता पक्ष का दावा: रामेश्वर शर्मा सहित सत्ता पक्ष के विधायकों ने मध्य प्रदेश में सड़कों के जाल, रिंग रोड और फ्लाईओवर निर्माण की प्रशंसा की। मंत्री राकेश सिंह ने विभाग में 'कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क' और 'लोकपथ ऐप' जैसे नवाचारों के बारे में बताया, जिससे सड़कों की गुणवत्ता और जवाबदेही तय होगी।
• विपक्ष के आरोप: विपक्ष ने सड़कों की खराब गुणवत्ता, जबलपुर-भोपाल हाईवे पर फ्लाईओवर के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। विधायक महेश परमार ने इंदौर मेट्रो और सड़कों के गड्ढों को लेकर सरकार पर तंज कसे।

जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण

कार्यवाही के अंतिम चरण में जनजातीय कार्य विभाग की मांगों पर चर्चा शुरू हुई। विधायक शरद कोल ने 'पीएम जनमन' और 'धरती आबा' योजनाओं के माध्यम से आदिवासियों के विकास पर जोर दिया। वहीं, डॉ. हिरालाल अलावा ने फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी लाभ लेने और आदिवासियों की जमीनें छीने जाने के गंभीर मुद्दे उठाए।
सदन में महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग के गठन में देरी पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। कार्यवाही के अंत में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से स्वीकृत कर ली गईं।
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