SDM सर्वेश यादव के खिलाफ नलखेड़ा के पंडितों का प्रदर्शन, ब्राह्मणों को हरामखोर कहते हैं

भोपाल, 8 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश में मौसम ठंड का चल रहा है लेकिन प्रशासनिक गलियारों में माहौल बहुत गर्म है। खाद की लाइन में लगे किसानों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार के दर्जनों वीडियो वायरल होने के बाद अब सुसनेर एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ नलखेड़ा स्थित पंडितों का बड़ा प्रदर्शन शुरू हो गया है। श्री यादव पर आरोप है कि वह ब्राह्मणों को हरामखोर कहते हैं। प्रदर्शनकारी पंडितों ने श्री यादव को पद से हटाने की मांग की है। एसडीएम का कहना है कि, किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया है। जो भी नियम बनाए गए हैं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। 

SDM सर्वेश यादव ब्राह्मणों को हरामखोर कहते हैं

पंडित योगेश शर्मा के अनुसार, मंदिर में लगभग 200 पंडित पिछले 25 सालों से नियमित रूप से हवन-अनुष्ठान कर रहे थे। उन्हें अचानक हटा दिया गया और अस्थायी रसीद व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। एसडीएम सर्वेश यादव बिना पूर्व सूचना और चर्चा के मनमाने ढंग से नए नियम लागू कर रहे हैं। इससे वर्षों से मंदिर में सेवा दे रहे पंडितों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।पंडित देवेंद्र शास्त्री बगलामुखी मंदिर में करीब 25 सालों से और योगेश शर्मा 20 सालों से हवन-पूजन अनुष्ठान करवा रहे हैं। पंडित देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि एसडीएम नए-नए नियम बनाकर हमें परेशान करते हैं। हमारे साथ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते है। खुद को सीएम का रिश्तेदार बनाकर हमें धमकाते हैं। वे हम पंडितों-ब्राह्मणों को हरामखोर कहकर हमारा अपमान करते हैं।

SDM सर्वेश यादव के साथ ब्राह्मणों का विवाद क्यों शुरू हुआ

दरअसल, पुरानी व्यवस्था के अनुसार 2100 रुपए के हवन के लिए 350 रुपए, 5100 रुपए के हवन के लिए 500 रुपए और 11 हजार रुपए के हवन के लिए 700 रुपए की रसीद मंदिर प्रशासन की बनाई जाती थी। नई व्यवस्था के अनुसार सारे स्लैब हटाते हुए सिर्फ एक स्लैब 2100 रुपए के हवन का रखा गया है। इसके कारण मंदिर में हवन अनुष्ठान करने वाले ब्राह्मणों द्वारा विरोध शुरू किया गया है।

नई व्यवस्था के मुताबिक, हवन से पहले रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी

पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि पहले मंदिर में हवन पूजन कराने के लिए पंडितों को किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं थी, जिसकी वजह से कोई भी पंडित जो पूजन पाठ का कार्य जानता है वह अपने परिचित जजमानों को पूजन करा देता था। नई व्यवस्था के अनुसार सभी पंडितों को रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश लागू किया गया है। जब तक रजिस्ट्रेशन न हो वे पूजा पाठ नहीं करवा पाएंगे। इस दौरान कई पंडितों ने रजिस्ट्रेशन करवाया लेकिन लास्ट डेट का पता नहीं होने के कारण कई पंडित इससे वंचित रह गए। इनमें कई ऐसे थे जिनकी तीन से चार पीढ़ियां मंदिर में पूजन पाठ करवाती चली आ रही हैं।

नए नियम ने पंडितों की म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग खत्म कर दी

पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि पुरानी व्यवस्था के अनुसार हवन कुंड बुक करवाने के बाद किसी वजह से जजमान नहीं पहुंच पाते या एक से अधिक जजमान एक ही पंडित के पहुंच जाते तो वह दो या अधिक कुंड बुक करवा कर अपने सहयोगी पंडित से अनुष्ठान करवा लेते थे। जजमान नहीं पहुंचने पर उस कुंड पर कोई अन्य पंडित आपसी सहमति से अपने जजमान को अनुष्ठान करवा देता था। नई व्यवस्था के अनुसार जिस पंडित के नाम से हवन कुंड बुक हुआ है वही पंडित वहां हवन अनुष्ठान करवाएगा। ऐसे में जिस पंडित के एक से अधिक जजमान एक समय आ जाते हैं, उनके सहयोगी पंडित हवन अनुष्ठान नहीं करवा पा रहे हैं।

मंदिर परिसर में पंडितों ने एसडीएम के खिलाफ की नारेबाजी

आक्रोशित पंडितों ने मंदिर परिसर में एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकाल के लिए हवन-अनुष्ठान बंद करने की घोषणा भी की। मामले की सूचना मिलने पर तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव और थाना प्रभारी नागेश यादव मंदिर परिसर पहुंचे। वे पंडितों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं। 

एसडीएम के पद से हटाने की मांग पर अड़े पंडित

एडीएम आरपी वर्मा ने करीब एक घंटा तक पंडितों से चर्चा की। इस दौरान एडीएम ने आश्वस्त किया कि एसडीएम मंदिर से संबंधित कोई निर्णय आगे से नहीं लेंगे लेकिन प्रदर्शनकारी पंडित, एसडीएम को सुसनेर अनुविभाग से हटाने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। सम्भवत; कल नलखेड़ा बंद का आव्हान भी किया जा सकता है।

एसडीएम बोले; मनमानी वसूली रोकने के लिए बनाए गए नियम

पूरे घटनाक्रम को लेकर एसडीएम सर्वेश यादव का कहना है कि हमारी ओर से किसी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया। हमने किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया है। यहां पर हवन को लेकर 2100, 3100, 5100 की अलग-अलग राशि पंडितों की ओर से वसूली जा रही थी। जिसको लेकर मैंने एक स्लैब ₹2100 वाला बनाया है, जिसे कोई अन्य हवन, किसी अन्य तरह की पूजा करवाना हो तो वह आवेदन देकर उस तरह का हवन पूजन करवा सकता है।

एसडीएम ने कहा कि पंडितों की ओर से मनमानी वसूली की जा रही थी, जिसको लेकर ही हमने नियम बनाए। यहां यह भी हो रहा था कि स्लॉट कोई अन्य पंडित का बुक होता था और उस पर हवन कोई अन्य करवाता था। जो भी नियम बनाए गए हैं वह मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ही बनाए गए हैं।
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