भोपाल, 31 दिसंबर 2025: नेहरू नगर में रहने वाले कॉलोनाइजर/बिल्डर श्री मणिराज सिंह के खिलाफ मध्यप्रदेश शासन की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा धारा 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके पहले EOW द्वारा शिकायत की जांच की गई थी जिसमें शिकायत सही पाई गई। मामला एक किसान की प्रॉपर्टी का है।
किसान अचल सिंह मेवाड़ा ने पावर ऑफ़ अटॉर्नी की थी
ग्राम बरखेड़ा नाथू, तहसील हुजूर स्थित कृषि भूमि के मूल स्वामी किसान अचल सिंह मेवाड़ा थे। उन्होंने 18 दिसंबर 2018 को अपनी जमीन के एक हिस्से की पॉवर ऑफ अटॉर्नी मणिराज के पक्ष में की थी। 7 फरवरी 2022 को अचल सिंह मेवाड़ा की मृत्यु हो गई।
पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी की वैधता का विवाद
कानून के अनुसार किसान की मृत्यु के साथ ही यह पावर ऑफ अटॉर्नी स्वतः ही समाप्त हो गई थी। नियम के अनुसार भूमि स्वामी की मृत्यु होने पर पावर ऑफ अटॉर्नी धारक का दायित्व होता है कि वह इसकी सूचना संबंधित पंजीयन कार्यालय को दे। आरोपी ने जानबूझकर यह जानकारी पंजीयन दफ्तर को नहीं दी।
धोखाधड़ी का अपराध: जांच में सामने आया कि आरोपी ने शासन, खरीदारों व लोगों को भ्रमित किया। खत्म हो चुकी पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए जमीन के अलग-अलग हिस्सों को प्लॉट बनाकर बेचा गया। फरवरी 2022 से दिसंबर 2022 के बीच आरोपी ने कुल 9 अलग-अलग रजिस्ट्रियां करवाई हैं। इन रजिस्ट्रियों के जरिए कृषि भूमि को अलग-अलग लोगों को बेचा गया और अवैध रूप से आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
शिकायत एवं जांच: ग्राम बरखेड़ी, तहसील हुजूर निवासी योगेश कुशवाह द्वारा दिनांक 18 जून 2025 को शिकायत की गई।ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान पंजीयन अभिलेख, संपदा सॉफ्टवेयर के रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंकिंग विवरण और संबंधित व्यक्तियों के बयान का परीक्षण किया। जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि किसान की मृत्यु के बाद भी जानबूझकर पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर जमीन बेची गई।
जांच में मिले ठोस साक्ष्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने इसे धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला माना है। पुलिस ने आरोपी मणिराज सिंह व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120-बी के तहत केस दर्ज कर लिया है।

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