14 दिसंबर को भोपाल मार्च: हाईकोर्ट एडवोकेट अनिल मिश्रा ने कूच का ऐलान किया

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 11 दिसंबर 2025
: मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट एडवोकेट अनिल मिश्रा ने सनातन समाज को एकजुट होने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि हमारे धर्म, संस्कृति और अस्मिता पर लगातार हो रही छींटाकशी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 14 दिसंबर को ऑपरेशन बगावत और ऑपरेशन अस्मिता के तहत भोपाल कूच का ऐलान किया गया है, जहां हजारों लोग सीएम हाउस पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। यह मार्च सनातन समाज की जागृति का प्रतीक बनेगा, जहां काले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।

सारे काम छोड़कर भोपाल पहुंचें

एडवोकेट अनिल मिश्रा, जो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, ने एक वीडियो मैसेज में कहा, "साथियों, हम अपने घरों से निकलेंगे और सीधे मुख्यमंत्री आवास पर जाकर हमारी आवाज बुलंद करेंगे। सनातन समाज पर थोपे जा रहे काले कानूनों, खासकर एससी/एसटी एक्ट को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह हमारी लड़ाई है, हमारा फर्ज है।" उन्होंने लोगों से अपील की कि सारे काम छोड़कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में भोपाल पहुंचें, क्योंकि जब हम उठते हैं तो सत्ता धराशायी हो जाती है। वीडियो में जय भवानी, जय जगदम्बा, हर हर महादेव और जय श्रीराम के नारे गूंजे।

मुख्य मांगें क्या हैं?

इस भोपाल मार्च में चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जो समाज की चिंताओं को उजागर करती हैं:
1. एससी/एसटी एक्ट जैसे काले कानून को तुरंत समाप्त किया जाए।
2. सत्ता की मनमानी और विकृत मानसिकता वालों को संरक्षण देना बंद हो।
3. बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ न हो, संतोष वर्मा जैसे विधर्मियों को सजा मिले।
4. धर्मांतरण जैसे गंभीर अपराधों पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो।

एडवोकेट मिश्रा का यह आह्वान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ट्विटर (अब एक्स) पर #14_दिसंबर_भोपाल_कूच, #बगावत और #अस्मिता जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई यूजर्स ने समर्थन जताया है, जैसे एक यूजर ने लिखा, "इस बार दिल्ली हिलनी चाहिए भोपाल से।" वहीं, कुछ ने गांव-गांव से सवर्ण समाज को एकजुट होने का संदेश दिया।

यह मार्च मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि यह जातिगत कानूनों और सामाजिक न्याय की बहस को फिर से गरमा सकता है। ऑपरेशन बगावत को सनातन समाज की जागृति के रूप में देखा जा रहा है, जहां लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आ रहे हैं।

आंदोलन का बैकग्राउंड 

इस आंदोलन का बैकग्राउंड हाल की एक विवादास्पद टिप्पणी से जुड़ा है। मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को दान करने की बात कही थी, जिससे पूरे समाज में आक्रोश फैल गया। वर्मा के खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज हुई हैं, और यह मुद्दा अब भोपाल मार्च का केंद्र बन सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर राष्ट्रवादी पीपुल्स पार्टी जैसे संगठनों ने समर्थन जताया है, कहते हुए कि जाति आधारित नीतियां राष्ट्रवाद को कमजोर कर रही हैं।

यह आंदोलन मध्य प्रदेश में सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक अस्मिता की बहस को नई दिशा दे सकता है।

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