Bitcoin की कीमत में इतनी गिरावट का क्या कारण है, क्या डिजिटल गोल्ड- कोयला बनने वाला है?

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025
: दिनांक 3 नवंबर को बिटकॉइन की कीमत में 4118 डॉलर (3.72%) की गिरावट दर्ज की गई। शाम 4:00 बजे बिटकॉइन की कीमत सिर्फ 1.05 लाख के आसपास रह गई थी। यदि ऐसी ही गिरावट होती रही तो 5 नवंबर को बिटकॉइन 1 लाख डॉलर के नीचे चला जाएगा। सवाल यह है कि बिटकॉइन की कीमत में इतनी गिरावट क्यों हो रही है। क्या डिजिटल गोल्ड अब कोयला बनने वाला है। क्रिप्टो एनालिस्ट एकता मौर्य के साथ जेमी एल्कालेह के एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस प्रश्न का उत्तर छुपा हुआ है।आइए, इस बातचीत को समझते हैं, क्योंकि यह न सिर्फ बड़े खिलाड़ियों की, बल्कि हर छोटे निवेशक की जिंदगी को छू सकती है।

राष्ट्रों के लिए बिटकॉइन की हिफाजत सिस्टम का सवाल

जब कोई देश अपनी तिजोरी में बिटकॉइन रखने का फैसला करता है, तो पहला सवाल "क्या रखें?" नहीं, बल्कि "कैसे रखें?" होता है। एल्कालेह के अनुसार, एक सॉवरेन स्टेट को जियोपॉलिटिक्स, जवाबदेही और बहु-स्तरीय जोखिमों के बारे में सोचना पड़ता है जो एक आम निवेशक या संस्था के लिए शायद न हो। सरल शब्दों में कहें, तो यह एक घर की चाबी छिपाने जैसा नहीं; बल्कि एक किले की रक्षा का पूरा प्लान है।

वे बताते हैं कि दुनिया भर में राष्ट्र अब कोल्ड स्टोरेज (ऑफलाइन रखाव), मल्टी-सिग वॉलेट्स (कई जगहों पर कुंजियां बांटना), और विश्वसनीय थर्ड-पार्टी कस्टोडियंस का मिश्रण अपना रहे हैं। ऊपर से, साफ ऑडिट और निगरानी फ्रेमवर्क भी। उदाहरण के तौर पर, ग्लोबल कस्टडी प्रोवाइडर्स अब "सॉवरेन-ग्रेड" सॉल्यूशंस पेश कर रहे हैं, जो ब्लॉकचेन की सुरक्षा को संस्थागत नियंत्रणों से जोड़ते हैं।

रेगुलेटरी मोर्चे पर, एल्कालेह कहते हैं कि बिटकॉइन कस्टडी को मौजूदा फाइनेंशियल सिस्टम में शामिल करना जरूरी है। ब्रिटेन में सुपरविजरी अप्रोच थोड़ी उदार लेकिन संरचित है, जबकि अमेरिका में SEC जैसी बॉडीज क्रिप्टो कस्टडी को "ट्रेडिशनल स्टैंडर्ड्स" के अधीन रख रही हैं। 

कुल मिलाकर, यह सिर्फ प्राइवेट कीज को सुरक्षित रखने का खेल नहीं बल्कि गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी, AML/KYC अनुपालन और लॉन्ग-टर्म इंटीग्रिटी का पूरा मॉडल डिजाइन करने का है। संस्थागत यूजर्स तो क्रिप्टोग्राफिक सिक्योरिटी के साथ-साथ बोर्ड-लेवल जवाबदेही भी मांगते हैं। वाकई, यह एक जिम्मेदारी भरा कदम लगता है, जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक कितनी भी तेज दौड़े, इंसानी विश्वास ही आधार है।

क्या राष्ट्रों का बिटकॉइन स्टॉक रिटेल ट्रेडर्स की जिंदगी बदलेगा? 

अब सवाल यह कि जब सरकारें बिटकॉइन इकट्ठा करने लगें, तो छोटे-मोटे रिटेल ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ेगा? एल्कालेह का मानना है कि यह बदलाव सूक्ष्म लेकिन गहरा होगा। सरकारों का कदम बिटकॉइन को "स्पेकुलेटिव टेक" से "इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट" या रिजर्व थिंकिंग की तरफ धकेलेगा। नतीजा, मार्केट में गहरी लिक्विडिटी आएगी, बड़े खिलाड़ी (सॉवरेन्स और इंस्टीट्यूशंस) रिटेल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे, और रिस्क-रिटर्न प्रोफाइल बदल सकती है। स्टडीज दिखाती हैं कि डिमांड अब "रिटेल-स्पेकुलेशन" से "स्ट्रैटेजिक एक्यूमुलेशन" की ओर मुड़ रही है।

लेकिन क्या क्लासिक चार-वर्षीय हाफिंग साइकिल अब बेकार हो गई? 

एल्कालेह स्पष्ट कहते हैं कि हाफिंग इवेंट्स, माइनर इकोनॉमिक्स और मार्केट सेंटिमेंट से जुड़ा यह साइकिल नेटवर्क के फंडामेंटल्स पर टिका है, जो नहीं बदला है। हां, ऑल टाइम हाई में थोड़ा गिरावट हो सकती है।
सॉवरेन डिमांड से स्टेडी एक्यूमुलेशन फेज आ सकता है। 

रिटेल ट्रेडर्स के लिए फायदा? 

ज्यादा स्थिरता, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसेमंद रेगुलेशंस, जो क्रिप्टो के "वाइल्ड वेस्ट" को थोड़ा सभ्य बनाएंगे। बड़े खिलाड़ियों के मूवमेंट्स का असर रिटेल को बाद में महसूस होगा। इसलिए, रिस्क मैनेजमेंट, क्वालिटी एसेट्स और रेगुलेटरी कांटेक्स्ट समझना हमेशा जरूरी रहेगा। 

अमेरिका का बिटकॉइन रिजर्व प्लान: 2026 में क्या उम्मीदें?

अमेरिका का केस सबसे दिलचस्प है, क्योंकि यहां स्केल और रेगुलेटरी जटिलताएं दोनों हैं। एल्कालेह बताते हैं कि फेडरल अप्रोच अभी सतर्क है। कस्टडी लॉ, वैल्यूएशन फ्रेमवर्क्स और एजेंसी कोऑर्डिनेशन को सुलझाना बाकी है। लेकिन दरवाजा बंद नहीं नहीं है। व्हाइट हाउस ने 6 मार्च 2025 को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया, जो "स्ट्रैटेजिक बिटकॉइन रिजर्व" और "यू.एस. डिजिटल एसेट स्टॉकपाइल" स्थापित करने का प्लान करता है।

2026 के लिए उनकी उम्मीद? 

कोई बड़ा ड्रामेटिक शिफ्ट, जैसे एक झटके में भारी खरीदारी, शायद न हो। लेकिन पायलट इनिशिएटिव्स, स्टेट-लेवल एक्सपेरिमेंट्स या गवर्नमेंट-टाईड इंस्टीट्यूशनल चैनल्स आ सकते हैं। अगर ब्रिटेन, सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग या APAC देश आगे बढ़ते दिखें, तो अमेरिका पर स्ट्रैटेजिक फाइनेंस का दबाव बनेगा। कंप्लायंस एंगल से, यह कस्टडी डेफिनिशंस, एसेट वैल्यूएशन, AML अलाइनमेंट और बिटकॉइन को हेज/डाइवर्सिफिकेशन के रूप में फ्रेम करने पर टिका होगा। ब्रॉडर मार्केट के लिए, अमेरिकी मूवमेंट रिटेल और इंस्टीट्यूशनल क्रॉसओवर को मजबूत करेगा – एक ऐसा कदम जो वैश्विक क्रिप्टो इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकता है।

कुल मिलाकर, एल्कालेह की यह बातचीत हमें याद दिलाती है कि बिटकॉइन जैसी तकनीक राष्ट्रों के लिए नई जिम्मेदारियां लाती है। यह बदलाव धीरे-धीरे आएगा, लेकिन सकारात्मक होगा। अगर आप रिटेल ट्रेडर हैं, तो चिंता न करें साइकिल अभी भी घूमेगा, बस रास्ता थोड़ा और मजबूत हो जाएगा। 

डिस्क्लेमर: यह न्यूज़ आर्टिकल केवल जानकारी और शिक्षा के लिए है। BhopalSamachar.com आपको किसी भी प्रकार के निवेश के लिए प्रेरित नहीं करता है। कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श के बाद ही इन्वेस्टमेंट का डिसीजन बनाएं। 
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