MP में शराबबंदी - शिवराज सिंह और मोहन यादव में अंतर, पढ़िए Bhopal Samachar

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शराबबंदी के विषय में पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विचार समान हैं। दोनों का कहना है कि पूरे प्रदेश में एक साथ शराबबंदी नहीं कर सकते। इसे धीरे-धीरे किया जा सकता है, लेकिन फिर भी दोनों के बीच एक मूलभूत अंतर है। शिवराज सिंह चौहान हमेशा कहते रहे कि जनता को जागरूक करने की जरूरत है। जब जनता माँग करेगी, तब शराबबंदी करना आसान हो जाएगा। और डॉ. मोहन यादव का कहना है कि पहले धार्मिक क्षेत्रों में शराबबंदी कर लेते हैं, फिर किसी और बहाने से कुछ और क्षेत्रों में शराबबंदी कर देंगे। एक व्यक्ति को विषय टालने के लिए बहाना चाहिए था, दूसरे व्यक्ति को आदेश जारी करने के लिए बहाना चाहिए।  

शिवराज सिंह शराब की पॉलिटिक्स करते रहे

वैसे तो शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल में कई जोखिमपूर्ण काम किए हैं, परंतु कुछ मामलों में वे हमेशा कमजोर साबित हुए हैं। शराब ऐसा ही एक विषय है। जीवन भर शराब के खिलाफ पॉलिटिक्स करते रहे, परंतु जब मुख्यमंत्री बने तो शराबबंदी की हिम्मत नहीं कर पाए। पूरी ताकत लगाकर सिर्फ इतना कहा कि, एक भी नई शराब की दुकान नहीं खुलेगी परंतु पुरानी शराब की दुकानों पर शराब का कोटा बढ़ाते चले गए। शराब से पैसा कमाया और शराब के कारण बर्बाद हुई महिलाओं को लाडली बहना योजना के नाम पर, उनके पतियों से लिया गया टैक्स वापस कर दिया। इस प्रकार मध्य प्रदेश की करीब एक करोड़ महिलाओं के परिवार बिगड़े, सरकार को कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन शराब कारोबारी की हमेशा बल्ले बल्ले होती रही।

डॉ. मोहन यादव ने शराब को लेकर कोई पॉलिटिक्स नहीं की। किसी सभा में कोई संकल्प नहीं लिया। माता-बहनों को 40-40 मिनट का लंबा भाषण नहीं सुनाया, लेकिन जो शराबबंदी शिवराज सिंह अपने 15 साल के कार्यकाल में नहीं कर पाए, वह डॉ. मोहन यादव ने 15 महीने के भीतर और मात्र 15 मिनट की मीटिंग में कर दिखाई। आज दिनांक 1 अप्रैल 2025 से मध्य प्रदेश के 19 शहरों में, जहाँ प्राचीन धार्मिक स्थल स्थित हैं, पूर्ण शराबबंदी हो गई है। 

मध्य प्रदेश के इन 19 शहरों में पूर्ण शराबबंदी लागू

मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश के 19 धार्मिक नगरों एवं ग्राम पंचायतों में की गई शराबबंदी की घोषणा पर एक अप्रैल 2025 से अमल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को 24 जनवरी 2025 को लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी महेश्वर में हुई कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। जिन धार्मिक स्थानों पर शराबबंदी का निर्णय लिया गया, उनमें एक नगर निगम, 6 नगर पालिकाएँ, 6 नगर परिषदें और 6 ग्राम पंचायतें हैं। जिन प्रमुख पवित्र नगरों में शराबबंदी लागू की जा रही है, उनमें बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी का उद्गम अमरकंटक, महेश्वर, ओरछा रामराजा मंदिर क्षेत्र, ओंकारेश्वर, मंडला में सतधारा क्षेत्र, मुलताई में ताप्ती उद्गम क्षेत्र, पीतांबरा देवीपीठ दतिया, जबलपुर भेड़ाघाट क्षेत्र, चित्रकूट, मैहर, सलकनपुर, साँची, मंडलेश्वर, वान्द्रावान, खजुराहो, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र मंदसौर, बरमान घाट और पन्ना शामिल हैं। एक अप्रैल 2025 से इन सभी क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी रहेगी।  

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