BNSS - जाँच एवं इनवेस्टिगेशन में क्या अन्तर होता है, कानून क्या कहता है, जानिए

सामान्य तौर पर हम जाँच और इनवेस्टिगेशन को एक ही शब्द बोलते हैं, परंतु वास्तविकता में दोनों शब्दों के बीच में बहुत अंतर होता है। 

जांच को अंग्रेजी में और INVESTIGATION को हिंदी में क्या कहते हैं

जांच को अंग्रेजी में इंक्वारी कहते हैं जबकि इन्वेस्टिगेशन का हिंदी अर्थ अन्वेषण होता है। किसी दावे अथवा शिकायत की सत्यता का परीक्षण, जांच कहा जाता है जबकि किसी उद्देश्य विशेष के लिए गवाह और सबूत को एकत्रित करने की प्रक्रिया इन्वेस्टिगेशन अर्थात अन्वेषण कहलाती है। दोनों के बीच में बड़ा अंतर है। जांच अथवा इंक्वारी में जांच करने वाला अधिकारी प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अपना निष्कर्ष प्रस्तुत करता है जबकि इन्वेस्टिगेशन अर्थात अन्वेषण के बाद, इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर प्राप्त हुए सबूत और गवाहों के आधार पर परिणाम प्रस्तुत करता है। ऐसी स्थिति में शिकायत करने वाले अथवा अन्य सभी का महत्त्व समाप्त हो जाता है। इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ही पार्टी हो जाती है। भारतीय कानून में इन दोनों शब्दों को अलग रखा है। जानिए :- 

1. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 2(1)(ट) की परिभाषा

विचारण से अलग कोई कार्रवाई मजिस्ट्रेट द्वारा तथ्यों या साक्ष्य के जुटाने के लिए की जाती है उसे जाँच (Inquiry) कहते हैं अर्थात्‌ जाँच मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा की जाती है। 

2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 2(1)(ठ) की परिभाषा

ऐसी कार्यवाही जो पुलिस अधिकारी या अन्य किसी अधिकारी के द्वारा किसी साक्ष्य को एकत्रित करने के लिए की जाती है उसे हम अन्वेषण (इनवेस्टिगेशन) कहते है। 

कुल मिलाकर, अन्वेषण एक न्यायिक कार्यवाही नहीं होती है जबकि जाँच एक न्यायिक कार्यवाही होती है एवं दोनों के उद्देश्य एवं क्षेत्र भी भिन्न हो सकते हैं।

हरदीप सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब मामले मे सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह कहा गया है कि जाँच आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रेषित होने के साथ ही प्रारंभ हो जाती हैं एवं यह मजिस्ट्रेट का कार्य है इसका पुलिस अन्वेषण से कोई संबंध नहीं होता है।

नोट:- विचारण जाँच से भिन्न होता है एवं यह एक न्यायिक कार्यवाही होती है, जिसका अंत आरोपी को दोषमुक्त या दोषसिद्ध करना होता है, लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में विचारण शब्द को कहीं परिभाषित नहीं किया गया है एवं न ही दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के परिभाषित किया गया था। लेखक✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद)। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

डिस्क्लेमर - यह जानकारी केवल शिक्षा और जागरूकता के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पहले बार एसोसिएशन द्वारा अधिकृत अधिवक्ता से संपर्क करें। 

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