MP NEWS - महिला शिक्षक नियुक्ति की मांग करते-करते सेवानिवृत हो गई, अब रिटायरमेंट फंड का विवाद

Bhopal Samachar
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यह शासकीय कर्मचारियों के विवादों की लिस्ट में सबसे अनोखा मामला हो सकता है। मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक महिला का शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए चयन किया गया। उसे ट्रेनिंग के लिए भेजा गया लेकिन नियुक्ति नहीं दी। यह लड़ाई इतनी लंबी चली कि जब कोर्ट ने महिला को नियुक्त करने के आदेश दिए तब तक महिला का रिटायरमेंट हो चुका था। अब एक बार फिर कोर्ट में लंबी लड़ाई शुरू हो गई है। महिला शिक्षक रिटायरमेंट फंड की मांग कर रही है। 

ट्रेनिंग के बाद 7 साल तक चक्कर लगाती रही

यह कहानी सन 1976 से शुरू हुई। शहडोल में रहने वाली हमीदा बेगम को मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु चयनित किया गया था। सन 1977 में हमीदा बेगम को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। एक साल बाद जब वह ट्रेनिंग पूरी करके वापस लौटी तो उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। 7 साल तक वह डिपार्टमेंट के चक्कर लगाती रही। 29 जून 1995 को जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र जारी किया। इसके आधार पर दिनांक 1 जुलाई 1995 को उन्हें महिला शिक्षक के पद पर नियुक्त कर दिया गया किंतु एक महीने बाद 1 अगस्त 1995 को उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। 

हाई कोर्ट ने आर्डर किया परंतु डिपार्टमेंट ने पालन नहीं किया

एक बार फिर संघर्ष शुरू हुआ। उन दिनों मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण में ऐसे मामलों की सुनवाई होती थी। महिला शिक्षक ने भी अपना मामला प्रस्तुत किया और सुनवाई शुरू हुई परंतु सन 2000 में मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण को बंद कर दिया गया और सभी मामले हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिए गए। 8 साल लंबे इंतजार के बाद हाई कोर्ट ने हमीदा बेगम को शिक्षक के पद पर पदस्थ करने की आदेश जारी किया परंतु डिपार्टमेंट ने आदेश का पालन नहीं किया। 

पहले नियुक्ति रोकी अब रिटायरमेंट रोक दिया

मध्य प्रदेश शासन की ओर से हाईकोर्ट के डिसीजन के खिलाफ अपील दाखिल कर दी गई। हाई कोर्ट ने अपील निरस्त कर दी, फिर भी डिपार्टमेंट ने आदेश का पालन नहीं किया। महिला शिक्षक ने हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला दर्ज करवाया। बड़ी मुश्किल से नौकरी मिली लेकिन तब तक उम्र हो चुकी थी। 2018 में उनका रिटायरमेंट हो गया। अब डिपार्टमेंट ने सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को दिए जाने वाले लाभ रोक दिए हैं। 2019 में महिला शिक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हाई कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है कि यदि वह चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत नहीं करते तो उन्हें कोर्ट में हाजिर होने के लिए वारंट जारी कर दिया जाएगा। 

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