MP NEWS- हाई कोर्ट में वकीलों की याचिका पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जिन निर्देशों के विरुद्ध पिछले दिनों अधिवक्ताओं द्वारा लंबे समय तक हड़ताल की गई थी। उस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रस्तुत हुई याचिका पर बहस पूरी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। 

जिला न्यायालय में समय सीमा का विवाद

जबलपुर स्टेट हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश की मुख्य पीठ की फूल कोर्ट मीटिंग में किए गए निर्णय के अनुपालन में रजिस्टार जनरल श्री रामकुमार चौबे द्वारा 21 दिसंबर 2022 तथा 5 एवं 19 जनवरी 2023 को प्रदेश के समस्त जिला न्यायालयों को जारी तीन परिपत्रों की संवैधानिकता को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधि रिटायर्ड अपर जिला न्यायाधीश श्री राजेंद्र कुमार श्रीवास द्वारा अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह के माध्यम से मार्च 2023 मे याचिका क्रमांक wp 7459/2023 तथा जनहित याचिका क्रमांक 14284/2023 दायर की गई थी। उक्त दोनों याचिकाओं की आज दिनांक 23/9/2023 को विशेष बेंच जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस  अवनीद्र सिंह की खंड पीठ द्वारा सनी की गई। 

अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि रजिस्टर्ड जनरल ने विवादित परिपत्रों में इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि संविधान के किस प्रावधान के तहत उन्हें इस प्रकार का निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है। अधिवक्ता ने कहा कि भारत के किसी भी न्यायालय को यह निर्देशित नहीं किया जा सकता कि वह किसी भी प्रकरण का कितने समय में निराकरण करेगा। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है। 

अधिवक्ताओं ने कहा कि विवादित परिपत्रों के कारण प्रदेश के अधिवक्ताओं द्वारा एक सप्ताह से अधिक अवधि तक हड़ताल भी की गई। कोर्ट को बताया गया कि, समय सीमा के निर्धारण करने से पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का समुचित समय नहीं मिल पाएगा। जिसके कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत भारत के नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों के फैसले को भी बताया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी प्रकरण को समय सीमा में निराकृत करने की अवधि का निर्धारण करने का अधिकार सिर्फ विधायिका को है, न्यायपालिका को नहीं। 

इस दौरान हाई कोर्ट द्वारा पूछा गया कि विवादित परिपत्रों के कारण पक्षकारों तथा अधिवक्ताओं को किस प्रकार की असुविधा हो रही है। याचिका में इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई है। अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने माननीय न्यायालय को बताया कि, यह याचिका रजिस्टर्ड जनरल महोदय द्वारा जारी निर्देशों की संवैधानिकता को चुनौती देने के लिए प्रस्तुत की गई है। 

अधिवक्ता के समस्त तर्कों को सुनने के उपरांत दोनों याचिकाओं को अंतिम फैसला हेतु रिजर्व कर लिया गया है।  पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे समाचार पढ़ने के लिए कृपया यहां क्लिक कीजिए। ✔ इसी प्रकार की जानकारियों और समाचार के लिए कृपया यहां क्लिक करके हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें। ✔ यहां क्लिक करके हमारा टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें।  ✔ यहां क्लिक करके व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन कर सकते हैं। क्योंकि भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल - व्हाट्सएप ग्रुप पर कुछ स्पेशल भी होता है।

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