MP NEWS- मध्य प्रदेश की राजनीति में ताकतवर होती एक नई जमात, अफसरशाही

Bhopal Samachar
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गुजरात की राजनीति में कारोबारी, महाराष्ट्र की राजनीति में फिल्म स्टार, उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में बाहुबली के बाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति में अफसरशाही का दबदबा बढ़ता जा रहा है। कड़ी परीक्षा पास करने के बाद आईएएस आईपीएस बने अफसर, इस्तीफा देकर विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। एमपीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास करने के बाद डिप्टी कलेक्टर बने अधिकारी भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। कुछ ऐसे अधिकारी हैं जो खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते लेकिन अपनी पत्नी या परिवार के दूसरे व्यक्ति को विधायक बनाना चाहते हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नई समाज पैदा हो गई है और इस बार यह काफी ताकतवर होती हुई दिखाई दे रही है। 

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के दावेदार अफसरों की लिस्ट

  1. कवींद्र किवायत IAS: लोकायुक्त की जांच की जद में लेकिन फिर भी मंदसौर में सक्रिय।
  2. रविंद्र कुमार मिश्रा IAS: कमिश्नर के पद पर काम करने के बाद भाजपा से टिकट के दावेदार।
  3. एमके अग्रवाल IAS: ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में प्रभावशाली, सीए-लॉयर भी हैं।
  4. वेद प्रकाश शर्मा IAS: जबलपुर पश्चिम में सक्रिय।
  5. एसएन सिंह चौहान IAS: BJP का मेनिफेस्टो बनाने में अहम भूमिका।
  6. रघुवीर श्रीवास्तव IAS: परिवार में कलह चल रही है लेकिन राजनीति में सक्रिय।
  7. डॉ. मुकेश तिलगाम, रेडियोलॉजिस्ट: इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल।
  8. डॉ. प्रकाश उइके, रिटायर्ड जज: ट्राइबल बेल्ट में एक्टिव, नि:शुल्क कोचिंग भी पढ़ाते हैं।
  9. देवेंद्र मरकाम, डॉक्टर: अगस्त में रिटायर होते ही भाजपा में शामिल।
  10. हेमराज बारस्कर, जीएसटी ऑफिसर: विद्यार्थी जीवन से सक्रिय। एबीवीपी और संघ से गहरा संबंध है।
  11. रूपचंद्र मईडा, पशु विभाग: आदिवासियों के बीच सक्रिय, टिकट के लिए इस्तीफा दिया।
  12. डॉ. रैलाश सेनानी, दंत चिकित्सक: संघ से जुड़े हैं, सेंधवा सीट से दावेदारी।
  13. विजय आनंद मरावी, डॉक्टर: टिकट मिलने के कुछ घंटे पहले छोड़ी थी नौकरी।
  14. कुंवर जी कोठार, इंजीनियर: सीएम ने खुद बुलाकर चुनाव लड़ने को कहा था।
  15. प्रभुराम चौधरी, डॉक्टर: एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान कर दी थी राजनीति की शुरुआत।
  16. माधो सिंह डावर, शिक्षक: जिला पंचायत सदस्य से राजनीति की शुरुआत।
  17. संजीव छोटेलाल उईके, प्रोफेसर: 2013 में चुनाव लड़ चुके हैं, पिता भी बड़े नेता रहे।
  18. एनपी वरकडे, IPS: लोकसभा टिकट के दावेदार थे, लेकिन अब विधानसभा का टिकट मांग रहे।
  19. महेश मालवीय, ग्राम सेवक: पिछला चुनाव पत्नी को लड़ाया, अब खुद दावेदार।
  20. बापू सिंह तंवर, एलआईसी एजेंट: 4 बार जिला पंचायत सदस्य रहे, वर्तमान में विधायक।
  21. अशोक मर्सकोले, डॉक्टर: तीन बार के विधायक रामप्यारे कुलस्ते को हरा चुके हैं।
  22. शैलेंद्र झारिया, डॉक्टर: सांची विधानसभा से कांग्रेस पार्टी का टिकट मांग रहे हैं।
  23. मोहन अग्रवाल, आबकारी अधिकारी: कोलारस विधानसभा से कांग्रेस मांग रहे हैं।
  24. डॉ. गोविंद मुजाल्दा, रेडियोलॉजिस्ट: लोकसभा हारे थे, अब विधानसभा के दावेदार।
  25. जगदीश धनगर, रिटायर्ड फौजी: कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं, सुवासरा सीट से दावेदार।
  26. अजिता वाजपेयी पांडे IAS: कांग्रेस के मेनिफेस्टो में अहम भूमिका निभाई।
  27. वी के बाथम, IAS: भोपाल की किसी भी सीट से टिकट दे पार्टी, चुनाव लड़ूंगा।
  28. शशि कर्णावत IAS: शिवराज सिंह सरकार को हराने के लिए चुनाव लड़ा या प्रचार कराओ, सब मंजूर।
  29. निशा बांगरे, SDM: इस्तीफा नामंजूर, फिर भी चुनाव लड़ने के लिए हर संभव रास्ते की तलाश।
  30. पुरुषोत्तम शर्मा, IPS: चुनाव लड़ने के लिए VRS मांगा लेकिन नहीं मिला।
  31. लक्ष्मण सिंह डिंडोर, CEO: कांग्रेस ने टिकट दे दिया था लेकिन इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ। 
  32. राजा भैया प्रजापति IAS: करैरा से चुनाव लड़ चुके, अब चंदला से लड़ने का ऐलान।
  33. वरदमूर्ति मिश्रा, IAS: नौकरी छोड़कर खुद की पार्टी बनाई।
  34. पुरुषोत्तम तिवारी, इंजीनियर: अलग पार्टी बनाई है, जबलपुर से खुद मैदान में।
  35. पन्नालाल सोलंकी, IAS: निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं।
  36. बी.चंद्रशेखर, IAS: पॉलिटिक्स के लिए 45 की उम्र में ही ऐच्छिक रिटायरमेंट लिया।
  37. आजाद सिंह डबास IFS: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ बुधनी से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

इसके अलावा लगभग आधा दर्जन आईएएस-आईपीएस ऐसे हैं, जो ना केवल अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़वाते हैं बल्कि, उसका प्रचार भी करते हैं। कुल मिलाकर चेहरा परिवार का कोई सदस्य होता है लेकिन असल में कुछ चुनाव लड़ते हैं। कारोबारियों और बाहुबलियों का राजनीति में आना तो समझ में आता है। उन्हें सरकार के संरक्षण की जरूरत होती है। फिल्मी कलाकारों की राजनीति में रुचि भी समझ में आती है क्योंकि, अपनी इंडस्ट्री में उन्हें स्पेशल अपीरियंस मिलती है, परंतु ब्यूरोक्रेसी तो वैसे भी पावर में होती है। उसकी मर्जी के बिना तो विधायक और मंत्री भी कुछ नहीं कर सकते। अनुसंधान का विषय है कि क्या कारण है जो एक कमिश्नर अपने पद से इस्तीफा देकर विधायक बनना चाहता है।
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