OBC आरक्षण NEWS- MP HIGHCOURT में सभी 65 प्रकरणों की सुनवाई कार्यवाही का विवरण

जबलपुर
 हाई कोर्ट एडवोकेट श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि, ओबीसी आरक्षण से संबंधित सभी 65 प्रकरणों की आज दिनांक 20/3/2023 को जस्टिस शील नागु एवं जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ द्वारा की गई, कोर्ट के संज्ञान मे इस तथ्य को लाया गया था की पूर्व मे भी मध्य प्रदेश सरकार ने दिनांक 30/3/2003 को 14 से बढ़ाकर 27% आरक्षण किया गया था, जिसे हाईकोर्ट की सिंगल बैच ने दिनांक 13/10/2014, को निरस्त कर दिया गया था। उक्त आदेश के विरुद्ध सरकार ने क्या कार्यवाही की है, इस संबंध में कोर्ट को अवगत कराये जाने का आदेश दिया गया था। उक्त आदेश के विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने न तो रिट अपील की है न ही सुप्रीम कोर्ट मे कोई कार्यवाही क्युकि उक्त आरक्षण तत्कालीन सरकार ने चुनाव के ठीक पूर्व दिनांक 30/6/2003 को नोटिफिकेशन जारी करके लागु किया गया था। 

2003 के चुनाव बाद प्रदेश मे सत्ता परिवर्तन होने के कारण हाईकोर्ट मे उक्त नोटिफिकेशन को चुनौती देने बाली याचिका क्रमांक 2798/2003 मे सरकार की ओर से विधिवत पक्ष नहीं रखा गया। उक्त याचिका मे शासन की ओर से एक पेनल अधिवक्ता द्वारा पैरवी की गई। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका क्रमांक 2798/2003 को हाईकोर्ट ने दिनांक 13/10/2014 को याचिका स्वीकार करके सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 30/6/2003 को निरस्त कर दिया गया । सरकार को उक्त आदेश के विरुद्ध रिट अपील करना चाहिए थी जो नहीं की गई तब जया ठाकुर द्वारा उक्त आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट मे विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गईं जो अभी विचाराधीन है।

हाईकोर्ट द्वारा उक्त प्रकरणों की आज दिनांक 20/3/23 को सुनवाई करते हुए उक्त तथ्य को गंभीरता से लिया गया तथा राज्य शासन को हाईकोर्ट ने कहा की उक्त याचिका क्रमांक का रिकार्ड तथा आदेश अगली सुनवाई को दाखिल किया जाए। आज सुनवाई के दौरान ओबीसी याचिका कर्ताओ की ओर से प्रकारणों की सुनवाई हेतु विशेष बैच के गठन हेतु दाखिल आवेदन पर विस्तृत सुनवाई की गई उक्त आवेदन OBC/एस. सी./एस. टी. एकता मंच के अध्यक्ष लोकेन्द्र गुर्जर की ओर से एडवोकेट उदय कुमार ने दाखिल किया गया था जिसमे उन्होंने उक्त प्रकरणों की सुनवाई करने हेतु न्यूट्रॉल/निष्पक्ष बैच, गठित करने की मांग की गई थी जिसमे ओबीसी तथा सामान्य वर्ग के जज न हो क्युकि उक्त समस्त प्रकरण ओबीसी के 27% आरक्षण को सामान्य वर्ग के याचिका कर्ताओ द्वारा चुनौती दी गई है। उक्त आवेदन के समर्थन मे हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों से अवगत कराया गया। 

सुनवाई कब दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि उक्त आवेदन मे कोर्ट जज पर कोई ब्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए गए है इसलिए उक्त आवेदन को ख़ारिज किया जाना उचित होगा तब याचिका कर्ता अधिवक्ता ने खुली कोर्ट मे कहा की आजादी के बाद से इस हाईकोर्ट मे एक भी SC, ST का जज नियुक्त नहीं हुआ है वर्तमान मे कालेजीयम मे जस्टिस शील नागु एक सीनियर मेंबर है जिन्होंने अपने कर्यकाल मे एक भी OBC/SC/ST के सदस्य का हाईकोर्ट जज के लिए संस्तुति नहीं किया गया है तथा पूर्व मे जस्टिस शील नागु द्वारा पारित अनेक फैसले संविधान के विरुद्ध तथा न्यायिक सिद्धांतों के विरुद्ध एवं आरक्षण के सामान्य सिद्धांत के विरुद्ध फैसले पारित किए गए है। 

जिसके सम्बन्ध मे प्रदेश के कई सामाजिक संगठनों ने माननीय को पद से हटाए जाने के लिए अनुच्छेद 124(4) के तहत सांसदों तथा राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, एवं भारत के मुख्य न्यायधीश को पत्र प्रेषित किए जा चुके है। इसलिए ओबीसी आरक्षण के उक्त प्रकरणों को सुनवाई करने का प्राकृतिक अधिकार नहीं है तथा उक्त प्रकरणों से माननीय जस्टिस शील नागु को अपने आप को स्वतः अलग कर लेना चाहिए था। 

अधिवक्ता के उक्त तर्कों को कोर्ट ने बड़ी गंभीरता से लिया तथा याचिकाकर्ता को हेवी कास्ट लगाने की चेतावनी दी गई, लेकिन उदय कुमार आपने तर्कों पर अडिग रहे तथा पुनः कोर्ट को बताया की यदि न्याय की बात करने मे कोई अवमानना निर्मित होती है तों मै जेल भी जाने को तैयार हूँ। हाईकोर्ट ने उक्त यचिका को आवेदन पर निर्णय के लिए रिजर्व रख लिए गए है, उक्त याचिका क्रमांक WP/20293/2019 हेतु कोर्ट मे 29/3/23 नियत की गई है। 

उक्त आवेदन ओबीसी एससी एसटी एकता मंच की ओर से प्रकरणों में स्पेशल बेंच गठित किए जाने का आवेदन दाखिल किया गया है। शासन की ओर से एडिशनल एडवोकेट आशीष बर्नार्ड तथा ओबीसी का पक्ष रखने हेतु नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह द्वारा पैरवी की गई तथा ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर लगभग 26 याचिकाओं में उदय कुमार साहू, आर. ज़ी. वर्मा, रामभजन लोधी, ओमप्रकाश पटेल, रूपसिंह मरावी, अंजनी कुमार कोरी, दीपचंद कोरी द्वारा पक्ष रखा गया। मध्य प्रदेश शासन को निर्देश दिए गए की पूर्व मे पारित आदेश के अनुरूप चाही गई जानकारी कोर्ट मे दाखिल की जाए। 

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