क्या सरकार किसी संस्था के सदस्यों को निष्कासित कर सकती है- supreme Court case

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है एवं इसी के आधार पर कोई भी व्यक्ति अपना संगठन, समूह या संस्था आदि गठित कर सकता है। आइए जानते हैं कि क्या सरकार के पास ऐसा कोई अधिकार है जिसके चलते सरकार कोई कानून बनाकर संस्था के सदस्यों को निष्कासित कर सके। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण जजमेंट:-

न्यायदृष्टान्त- दमयंती बनाम भारत संघ (1971) 

उक्त मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया कि संस्था बनाने के अधिकार का अनिवार्य रूप से यह अर्थ है कि संस्था बनाने वाले व्यक्ति को केवल उन्हीं व्यक्तियों से संबंध रखने का अधिकार है जिन्हें वे स्वेच्छा से संस्था में स्वीकार करते हैं।

कोई कानून (विधि) जिसके द्वारा स्वैच्छिक संस्था में प्रवेश दिए गए सदस्यों को बिना किसी विकल्प के बाहर कर दिया जाता हैं या कोई विधि स्वैच्छिक रूप से शामिल होने वाले सदस्यों की सदस्यता हटा लेती हैं तब ऐसा प्रत्येक कानून संस्था बनाने के अधिकार का उल्लंघन करता हैं। 

साधारण शब्दों में कहे तो कोई भी संस्था,संगठन, ट्रस्ट का अध्यक्ष (संचालक) या सरकार ऐसा कानून बनाकर संस्था के सदस्यों को नहीं हटाएगी जिसका कोई ठोस अर्थ न हो। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

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