मध्य प्रदेश में गरीबों को गेहूं वितरण बंद, सरकार ने विदेश में बेच दिया, 20 जिलों में दाना तक नहीं- MP NEWS

मध्यप्रदेश में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत गरीबों को निशुल्क या नाममात्र की कीमत पर गेहूं वितरण बंद कर दिया गया है। खबर आ रही है कि 20 जिलों में गेहूं का एक भी दाना नहीं दिया जा रहा। जबकि शेष जिलों में 4 की जगह पर 2 किलो गेहूं दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने इस बार सहारा गेहूं विदेश में बेच दिया है। 

मध्य प्रदेश के इन 20 जिलों में गेहूं का एक दाना नहीं दे रहे

भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, रायसेन, रीवा, सतना, सिवनी, सीधी एवं सिंगरौली में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत गेहूं वितरण बंद कर दिया गया है। सिर्फ चावल दिया जा रहा है। इसके अलावा अनूपपुर, बालाघाट, डिंडोरी, मंडला, शहडोल, उमरिया में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत सिर्फ चावल ही बंट रहा है। मांगने पर भी गेहूं नहीं दिया जा रहा है। 

मध्य प्रदेश के शेष जिलों में 4 की जगह पर 2 किलो गेहूं
मध्य प्रदेश के शेष जिलों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल दिए जाते थे। अब यह अनुपात बदल दिया गया है 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल दिए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में गेहूं मुख्य खाद्य है जबकि चावल को लोग स्वाद या गेहूं के ना होने की स्थिति में अस्थाई विकल्प के रूप में उपयोग करते हैं। 

अधिकारी के बहाने और अंदर की बात

दीपक सक्सेना, संचालक, खाद्य-नागरिक आपूर्ति का कहना है कि केंद्र सरकार का रेशियो बदला है इसलिए पीएमजीकेएवाई के तहत सिर्फ 5 किलो चावल दिया जा रहा है। अन्य जिलों में अनाज का अनुपात क्यों बदला इसके जवाब में सक्सेना ने बताया कि पिछले साल की तुलना में खरीदी कम हुई है। 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस बार विदेशों से गेहूं की डिमांड ज्यादा आ गई थी। सरकार ने इस बात का फायदा उठाया और ज्यादा से ज्यादा गेहूं विदेश में बेच दिया। पैसा कमाने की होड़ में सरकार ने गरीबों का यह भी बेच दिया। अब गोदाम में गेहूं का दाना तक नहीं है।

BHOPAL की PDS दुकानों में 40000 क्विंटल गेहूं लेकिन बांटने की अनुमति नहीं

खाद्य विभाग के अफसरों ने बताया कि केंद्र सरकार ने मई में 3 लाख 79 हजार 323 मीट्रिक टन का कोटा मप्र में पीडीएस के लिए जारी कर दिया था, लेकिन शॉर्टेज के बाद इसे घटाकर 1 लाख 66 हजार 112 मीट्रिक टन कर दिया। जबकि चावल 1 लाख 26 हजार 441 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 3 लाख 39 हजार 652 मीट्रिक टन कर दिया है। 

इस रेशियो में बदलाव के बाद भोपाल की 400 से ज्यादा पीडीएस दुकानों पर 40 हजार क्विंटल गेहूं भरा हुआ है। इसकी कीमत करीब 8 करोड़ 60 लाख रुपए है, लेकिन इसे बांटने की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। इसकी वजह प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना है।