MP College news- पढ़िए इस साल कैसी पढ़ाई होगी नई शिक्षा नीति के तहत

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मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। पिछले साल न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत परीक्षाएं हुई थी इस साल पूरी पढ़ाई न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत होगी। इसके लिए हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा गाइडलाइन जारी कर दी गई है। 

सब्जेक्ट ग्रुप के अलावा दूसरी फैकल्टी की पढ़ाई कैसे होगी

मध्यप्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत छात्र मेजर, माइनर के अलावा ओपन इलेक्टिव और वोकेशनल कोर्स का चयन कर चुके हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि छात्र अपने सब्जेक्ट ग्रुप से हटकर अन्य संकाय का ऐसा विषय पढ़ना चाहता है जो कॉलेज में नहीं है तो वह दूसरे शासकीय कॉलेज में उस विषय की पढ़ाई करने जा सकेगा। यदि छात्र ज्यादा हैं तो उन्हें पढ़ाने दूसरे कॉलेज के शिक्षक आ सकेंगे। इसे लागू कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त ने संभाग मुख्यालयों पर क्लस्टर बनाकर पढ़ाई कराने को कहा है। साथ ही 7 दिन में क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक से रिपोर्ट मांगी है।

पिछले साल एक भी स्टूडेंट ने रिस्क नहीं ली थी

छात्रों को मेजर, माइनर विषय को छोड़कर तीसरा विषय अन्य किसी भी संकाय से लेने की छूट दी गई है। इसके बावजूद पिछले सत्र में भोपाल में मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) में एक भी छात्र ने आर्ट्स या कामर्स के विषय नहीं चुने। यहां मैथ्स ग्रुप्स से बीएससी करने वाले विद्यार्थियों ने मैथ्स ग्रुप्स से और बायोलॉजी ग्रुप्स के छात्रों ने बायोलॉजी ग्रुप्स के विषय ही लिए थे। इसी तरह शासकीय हमीदिया आर्ट्स एंड कामर्स पीजी कॉलेज में भी पिछले सत्र में बीए, बीएससी, बीकॉम में जो सब्जेक्ट कांबीनेशन पहले से चले आ रहे थे, उन्हीं में पढ़ाई की। यही हाल भोपाल के अन्य 9 सरकारी कॉलेजों के भी रहे। जहां विद्यार्थियों ने उनके ही संकाय के विषय चुने थे।

मध्यप्रदेश में न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत पढ़ाई की व्यवस्था

साइंस कॉलेज में स्टूडेंट्स यदि आर्ट्स या काॅमर्स संकाय के किसी विषय को चुनते हैं और ऐसे विद्यार्थियों की संख्या कम है तो वे नजदीकी शासकीय आर्ट्स या काॅमर्स कॉलेज में पढ़ाई करने जा सकते हैं। इसके लिए टाइम टेबल में दोनों कॉलेजों द्वारा समन्वय किया जाएगा।
साइंस कॉलेज में यदि आर्ट्स या कामर्स संकाय के किसी विषय को चुनने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक है तो नजदीकी आर्ट्स या कामर्स संकाय वाले कॉलेज के शिक्षक साइंस कॉलेज आकर पढ़ाई करा सकते हैं। जिसे उनके वर्कलोड में भी शामिल किया जाएगा।

निर्देश मिले थे, लेकिन...कॉलेजों ने नहीं ली रुचि

उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश है कि कॉलेज अपने संसाधन अनुसार व्यवस्थाएं करें। इसलिए अधिक कॉलेजों ने अन्य संकाय के विषयाें को पढ़ाने में रुचि नहीं ली। ऐसे कॉलेज जिनमें आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, होम साइंस में से तीन या चार संकाय हैं, उनमें कॉलेजों ने एक संकाय के छात्रों को दूसरे संकाय के विषय पढ़ाने में भी रुचि नहीं ली। इसके लिए वे मेरिट के आधार पर विषयों की सीट संख्या तय कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया गया।

कॉलेजों से इस बारे में जानकारी ली जा रही है
क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। कॉलेजों से जानकारी ली जा रही है, लेकिन अभी तक ऐसी जानकारी नहीं आई जिसमें छात्रों ने अपने कोर्स के मुख्य विषयों के अलावा अन्य सब्जेक्ट ग्रुप से विषय लिए हों।
-डॉ. मथुरा प्रसाद, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग
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