किसी की मर्जी के बिना उसका MOBILE-COMPUTER ऑन करना, कितना गंभीर अपराध है, पढ़िए IT Act 2000

पिछले लेख की धारा में हमने आपको बताया था कि किसी कम्प्यूटर डाटा बेस या प्रोग्रामों से छेड़छाड़ करना (कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद डाटा में परिवर्तन करना) IT ACT की धारा 65 के अंतर्गत अपराध है। अगर कोई व्यक्ति किसी कम्प्यूटर के स्वामी की या उस विभाग के प्राधिकारी की (जिसमे कम्प्यूटर संस्थापित हैं) आज्ञा के बिना छेड़छाड़ करता है या प्रदूषित आदि करता है यह एक अलग धारा के अंतर्गत अपराध होगा पढ़िए। 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 43 की परिभाषा:-

कोई भी व्यक्ति किसी कम्प्यूटर स्वामी (मालिक) की आज्ञा के बिना या किसी प्राधिकृत अधिकारी की आज्ञा के बिना:-
• कम्प्यूटर सिस्टम को चलाता है या चलाने का प्रयास करता है।
• कम्प्यूटर सिस्टम या कम्प्यूटर नेटवर्क से कोई आंकड़े का संचय करना, कोई सूचना या आंकड़े की प्रतिलिपि निकलता है।
• कम्प्यूटर सिस्टम के नेटवर्क को नष्ट करेगा, आंकड़ों में फेरबदल करेगा,नुकसान करेगा,या कम्प्यूटर सिस्टम की विच्छिन करता है या कोई वाइरस कम्प्यूटर में प्रवेश करता है या करवाता है।
• किसी व्यक्ति को कम्प्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुचाने के लिए आसान तरीका बताता है या कम्प्यूटर अपराध को करने के लिए सरल तरीका बताता है।
• कम्प्यूटर सिस्टम से या नेटवर्क से किसी सूचना को नष्ट करता है या लोप करता है या महत्वपूर्ण उपयोगिता वाले लेखो,सूचनाओ आदि की उपयोगिता कम करता है या अन्य प्रकार की कम्प्यूटर नेटवर्किंग सेवाओ से छेड़छाड़ करता है।
• कम्प्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में जाकर किसी डिजाइन, चित्र, अंक-चिन्हों,रेखांकित चिन्हों या चित्रो आदि को छिपाता हैं, नष्ट करता है, परिवर्तन करता है, चोरी करता है या प्रतिलिपि करता है।

उपर्युक्त कृत्य करने वाला व्यक्ति सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम,2000 धारा की धारा 43 के अंतर्गत दोषी होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 43 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान आई. टी. एक्ट की धारा 66 में किया गया है , यह अपराध समझोता योग्य है उसी न्यायालय द्वारा जहाँ अपराध का विचारण है एवं यह संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध हैं। अधिनियम की धारा 78 के अनुसार अपराध का इन्वेस्टिगेशन करने की शक्ति निरीक्षक (इंस्पेक्टर) की नीचे की पक्ति का पुलिस अधिकारी नहीं करेगा। सजा- इस अपराध के लिए अधिकतम तीन वर्ष की कारावास या पांच लाख रुपए का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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