पृथ्वी पर लोहे का सबसे बड़ा टुकड़ा, जो अंतरिक्ष से गिरा था, पढ़िए कहां और कैसा है- GK in Hindi

Bhopal Samachar
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जनरल नॉलेज आपको स्पेशल बनाती है। कितना मजेदार है यह जान लेना कि पृथ्वी पर लोहे का सबसे बड़ा टुकड़ा कहां पर स्थित है। वह टुकड़ा जो अंतरिक्ष से गिरा था। जिसे उल्का पिंड (Meteorite) का हिस्सा कहा जाता है और आश्चर्यजनक रूप से वायुमंडल में प्रवेश करने के बावजूद जो नष्ट नहीं हुआ। आइए पढ़ते हैं:- 

होबा उल्कापिंड- कब, कहां, कैसे सहित कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर 

पृथ्वी पर मौजूद लोहे के सबसे बड़े टुकड़े को होबा उल्कापिंड कहते हैं। यह अफ्रीका के एक देश नामीबिया (जहां जानवरों की संख्या और प्रजातियां सबसे ज्यादा पाई जाती हैं) में मिला। कहते हैं कि यह एक उल्कापिंड का टुकड़ा है। अंतरिक्ष में करोड़ों उल्का पिंड यहां-वहां गिरते और टकराते रहते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल के संपर्क में आते ही ज्यादातर उल्का पिंड घर्षण के कारण नष्ट हो जाते हैं, लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि, यह उल्कापिंड नष्ट नहीं हुआ। 

पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़ा उल्का पिंड

वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 80,000 साल पहले यह उल्कापिंड पृथ्वी पर आकर गिरा था। अंतरिक्ष विज्ञानियों का कहना है कि वायुमंडल में प्रवेश के समय उल्का पिंड की गति 10 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। यदि यह उल्कापिंड उतनी ही स्पीड से धरती पर आकर गिरता तो पाताल (इतने नीचे जहां इंसान नहीं पहुंच सकते) में चला जाता, लेकिन इसकी गहराई देखने के बाद दावे के साथ कहा जा सकता है कि गिरते समय इसकी स्पीड मात्र 320 मीटर प्रति सेकंड रही होगी। आश्चर्य की बात यह है कि उल्का पिंड की स्पीड कैसे कम हुई। 

होबा उल्कापिंड की खोज किसने की

बताया गया है कि इसका वजन 60 टन से अधिक है लेकिन कभी इसे किसी तराजू पर तौला नहीं गया। यहां तक की इस टुकड़े को कभी हटाया भी नहीं गया। सन 1920 में कबस हरमनस ब्रिट्स नाम के किसान का हल अचानक जमीन के अंदर रुक गया। किसान ने जब उस स्थान की खुदाई की तो यह विशाल पत्थर निकल कर आया। बाद में पता चला कि यह तो धातु का बहुत बड़ा टुकड़ा है। दुनिया भर के खगोलविदों के लिए यह स्थान किसी तीर्थ से कम नहीं है। 

किसान और कारोबारी में क्या अंतर होता है 

नामीबिया में धरती की सतह पर इतना बड़ा उल्कापिंड देखने के लिए दुनिया भर के लोग जाने लगे। इसके कारण उल्का पिंड को नुकसान पहुंचने का खतरा उत्पन्न हो गया। 1955 में उल्कापिंड को नामीबिया का राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया। यदि कोई कारोबारी होता तो इस अवसर का भरपूर फायदा उठाता परंतु किसान भारत का हो या नामीबिया का, उसकी मानसिकता हमेशा एक जैसी रहती है। कबस हरमनस ब्रिट्स ने उल्कापिंड सहित अपने पूरे खेत को शैक्षिक उद्देश्यों के लिए दान कर दिया। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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