MP TET VARG-3 TOPIC- जीन पियाजे पार्ट-2: रचना एवं आलोचनात्मक स्वरूप

Bhopal Samachar
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यह टॉपिक एमपी टेट वर्ग 3 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है। इसके अलावा और भी टीचिंग एग्जाम्स के लिए भी टॉपिक काफी महत्वपूर्ण है। अब हम इन चारों मनोवैज्ञानिकों के बारे में एक-एक करके डिटेल में पढ़ेगे।

जीन पियाजे (Jean Piaget) -
जीन पियाजे को बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) का फादर या जनक कहा जाता है। जो कि एक Swiss Psychologist होने के साथ साथ radical constructivism भी थे। उन्होंने विकास की अवस्थाओं पर भौतिक पर्यावरण (Physical Environment) के प्रभाव पर अधिक जोर दिया। उन्होंने बताया कि बच्चे अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं और उन्होंने बच्चों को नन्हे वैज्ञानिक (Little Scientist) भी कहा। 

जीन पियाजे ने एक बच्चे के संज्ञानात्मक विकास को 4 अवस्थाओं में विभाजित किया है-
1. इंद्रिय जनित गामक अवस्था (Sensorimotor Stage) 
2. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre- Operational Stage) 
3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete- Operational Stage) 
4. औपचारिक या अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal- Operational Stage)

जीन पियाजे (A swiss Psychologist) जिन्होंने बच्चों को नन्हे वैज्ञानिक यानी Little scientist भी कहा। उनके अनुसार यह अवस्था पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre operational stage ) कहलाती है जो लगभग 2 से 6 वर्ष तक होती है। इस अवस्था में बच्चे animism (जीववाद) में विश्वास करते हैं। उन्हें निर्जीव चीजें भी सजीव लगती हैं। उदाहरण के तौर पर यदि उसे किसी चीज से चोट लग जाए तो जब तक हम उस चीज को मारते नहीं है, तब तक उसको अच्छा नहीं लगता। वह सोचता है कि इस चीज की वजह से मुझे चोट लगी है तो इसको भी मारना चाहिए। वह सोचता है कि वह वस्तु भी जीवित ही है। 

इस अवस्था में बच्चा ( Egocentric) अर्थात अहम केंद्रित होता है। वह खुद के अलावा किसी और के बारे में नहीं सोचता। चांद गोल है, उसकी बॉल भी गोल है, तो उसकी बॉल ही चांद है, इस तरीके के टेढ़े मेढ़े लॉजिक लगाने लगता है। अगर कोई सामान लेने कहीं भेजा है तो वह चला तो आसानी से जाएगा परंतु वापस आने में उसको प्रॉब्लम हो सकती है क्योंकि उसमें परिवर्तनशीलता का गुण (Irreversiblilty of thoughts) नहीं आता। वह 5+4= 9 समझता है परंतु 5+2+2 = 9 नहीं समझ पाता। 

एक बार में केवल एक ही चीज पर पर फोकस कर पाता है परंतु चीजों को तोड़कर, खोलकर पता करना चाहता है की कोई चीज कैसे बनी है। इसी कारण जीन प्याजे ने इन्हें नन्हे वैज्ञानिक कहा। ऐसा आपने भी कभी ना कभी जरूर किया होगा। जैसे कांच के पेपर वेट को सभी तोड़कर देखते हैं कि आखिर उनके अंदर है क्या। या पेन को खोल कर देखना कि इसके अंदर आखिर है क्या। 

तो यह सब बच्चे अपने वर्ल्ड को explore करने के लिए करते है। उनका इरादा चीजों को तोड़ने का नहीं होता बल्कि वह तो जानना चाहते हैं कि चीजें बनी कैसे हैं, इसी कारण ने उन्हें लिटिल साइंटिस्ट कहा जाता है। 
मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.
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