शादी से संबंधित अपराधों का परिवाद, कोर्ट में कौन दाखिल कर सकता है कौन नहीं- CrPC section 198

आज के लेख में हम उन अपराधों की बात कर रहे हैं जो भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय 20 की धारा 493 से 498 तक उपबंधित हैं अर्थात धारा 493 के अनुसार अठारह वर्ष से कम उम्र कि स्त्री को पत्नी बनाकर रखना। धारा 494 के अनुसार पति या पत्नी के जीवित रहते हुए पुनः विवाह करना (बिना तलाक, विवाह शून्य एवं शून्यकरण के)। धारा 495 के अनुसार पहला विवाह छिपाकर दूसरा विवाह करना। धारा 496 के अनुसार बनावटी, अवैध, नकली शादी करना। धारा 498 किसी शादीशुदा स्त्री को आपराधिक उद्देश्य से बहला फुसलाकर या प्रलोभन द्वारा ले जाना। उक्त संबंधित अपराधों के बारे में न्यायालय में कौन शिकायत कर सकता है और कौन नहीं, आइए जानते हैं:- 

दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 198 की परिभाषा (सरल एवं संक्षिप्त शब्दों में) 

कोई भी न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता,1860 के अध्याय 20 के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान ऐसे पीड़ित व्यक्ति द्वारा किए गए परिवाद पर लेगा:-
1. अगर पीड़ित व्यक्ति की उम्र अठारह वर्ष से कम है या अगर व्यक्ति पागल, जड़ बुद्धि या किसी रोग से ग्रस्त हैं या कोई स्त्री किसी प्रथा के अंतर्गत नहीं आ सकती है तब उसका कोई भी संरक्षक न्यायालय की अनुमति पर परिवाद दायर कर सकता है 

2. अगर कोई पति संघ (केन्द्र) की सशस्त्र सेनाओं में कार्यरत है वह किसी अन्य व्यक्ति को भी न्यायालय में परिवाद दायर के लिए भेज सकता है लेकिन इसके पूर्व उसे अपने ऑफिसर द्वारा ऐसा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा जिसमें यह बताया गया हो कि वह न्यायालय में परिवाद के लिए क्यू नहीं आ रहा है।

3. अगर कोई अपराध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 494 एवं धारा 495 के अधीन दण्डनीय हैं, और पीड़ित कोई पत्नी हैं तब पत्नी की और से उसके माता-पिता, भाई-बहन, पुत्र-पुत्री, दत्तक पुत्र-पुत्री या रक्त से सम्बंधित कोई भी व्यक्ति न्यायालय की मंजूरी से परिवाद दायर कर सकते हैं।

नोट:- दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 (6) के अनुसार अगर कोई पत्नी की उम्र 18 वर्ष से कम है तब वह शादी के एक वर्ष के भीतर पति पर मैथुन (बलात्संग) का परिवाद दायर कर सकती है, लेकिन महिला द्वारा एक वर्ष बाद दायर याचिका न्यायालय में मान्य नहीं होगी। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com


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