क्या आरोपी अपनी मनपसंद न्यायालय में सुनवाई करवा सकता है- CrPC section 191

दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 190 बताती है कि कोई भी व्यक्ति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आपराधिक मामले का परिवाद दायर कर सकता है एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐसे अपराध पर तुरंत संज्ञान ले सकता है। लेकिन क्या आरोपी को यह हक है कि वह अपने ऊपर लगे अपराध की सुनवाई उसके अनुसार बताए न्यायालय में करवा सकता है जानते हैं इसका जबाब।

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 191 की परिभाषा:-

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास अगर कोई व्यक्ति स्वयं उपस्थित होकर किसी अपराध की शिकायत करता है, तब आरोपी व्यक्ति से कोई साक्ष्य लेने से पहले मजिस्ट्रेट उसे सूचना देगा कि वह इस अपराध की जांच या विचारण किसी अन्य मजिस्ट्रेट से करवा सकता है। आरोपी अगर कोई आपत्ति हैं करता है तो मामला अन्य मजिस्ट्रेट को भेज दिया जाएगा। 

अर्थात यह धारा आरोपी व्यक्ति को अधिकार देती है कि वह आपने ऊपर लागे इल्जाम का अपराध की जाँच या विचारण दूसरे न्यायालय में भी करवा सकता है लेकिन कुछ शर्तो के अनुसार। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी अन्य न्यायालय का चुनाव आरोपी द्वारा नहीं किया जा सकता। वह केवल न्यायालय बदलने का निवेदन कर सकता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com


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