मोटीवेशन- इतिहास रचता है, जब हौसलों से उड़ान होती है - MOTIVATIONAL ARTICLE IN HINDI

शक्ति रावत।
हम सभी साधारण लोग हैं, लेकिन जब साधारण लोग भी कुछ मन में ठान लेते हैं, तभी इतिहास बनता है। आपने यह तो सुन ही रखा होगा कि, पंख तो सभी के पास होते हैं, लेकिन जीवन की असली उड़ान पंखों से नहीं बल्कि हौसलों से होती है। हौसलों की उड़ान की एेसी ही एक कहानी इस बार आपके लिए जिसे इतिहास ने स्वर्ण अक्षरों में इसरो के मिशन मंगलयान के तौर पर साल 2014 में दर्ज किया था। जिसमे मॉम भी कहा जाता है।  जिसके बाद मंगल पर पहले ही प्रयास में पहुंचने वाला भारत ना सिर्फ दुनिया का पहला देश बना बल्कि सीमित साधनों के साथ कीर्तिमान रच दिया। ये बात और है, कि ज्यादातर लोगों को अपने ही देश की कामयाबी की यह कहानी फिल्म आने के बाद पता चली।

1- सटीक रणनीति
आपको शायद यकीन ना हो कि इसरो के पास मंगल तक पहुंचने की क्षमता वाला राकेट ही नहीं था, हमारा पीएसएलवी सिर्फ चांद तक जा सकता था, लेकिन 5 वैज्ञानिकों की टीम के सामने एक ही लक्ष्य था, इतिहास रचने का। इस टीम ने लगातार 18-18 घंटे काम किया। सीमित ईधन क्षमता के उपयोग का आइडिया गैस पर गर्म तेल से लिया गया। उपकरणों को हलका किया गया, वजन घटाया गया। चंद्रयान की वजह से पहले मिशन कैंसिल हुआ, फिर टीम तैयार की गई।

2- मुश्किलों का सामना
 करीब 24 महीने से ज्यादा के इस मिशन में मुश्किलें कम नहीं थीं, अब तक देश बड़े अंतरिक्ष कार्यक्रम नासा की मदद से ही करता रहा था, पहली बार देश में ही सबकुछ तैयार करना आसान नहीं था, कदम-कदम पर चुनौतियां और मुश्किलें थीं, ईधन से लेकर स्पेसक्राफ्ट तक कई सवाल थे, अभियान के लिए कई एक्यूपमेंट चंद्रयान से लिये गए। लेकिन अनुराधा टी के और उनकी टीम ने हर मुश्किल का हल निकाला।

3- सीमित संसाधन
मिशन मंगलयान के लिए अलग से कोई बजट नहीं था, इसके लिए चंद्रयान के 450 करोड़ की राशि उपयोग की गई थी, जो एक हॉलीबुड फिल्म के बजट से भी कम था, मंगलयान का खर्च लगभग 7 रूपये प्रतिकिलोमीटर था, ऑटो रिक्शा के किराये से भी कम। सीमित बजट और सीमित संसाधनों के साथ इसरो की टीम ने वह कर दिखाया था, जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी।

4- अंत तक हिम्मत ना हारना
इसरो की इस टीम के पास मंगल तक पहुंचने के लिए सीमित समय था, लॉचिंग डेट 29 अक्टूबर थी, लेकिन उसके पहले ही जबरदस्त बारशि और तूफान का दौर शुरू हो गया, जो 8 दिन तक ना रूका। जिसकी वजह से लॉचिंग नहीं हो पा रही थी, टीम के पास आखरी मौका 5 नंबवर 2013 को था, उस दिन भी सुबह से जोरदार बारिश थी, ज्यादातर लोग निराश हो चुके थे, मिशन डूबने को था, लेकिन टीम लीडर्स ने हिम्मत नहीं हारी। आखिर में हौसले की जीत हुई बारिश रूकी और मंगलयान लॉंच हुआ, और 24 सिंतबर 2014 को दुनिया ने हमारी ताकत देखी। - लेखक मोटीवेशनल एंव लाइफ मैनेजमेंट स्पीकर हैं।


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