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गोल मैनेजमेंट- चार नियम जो मंजिल तक पहुंचाते हैं

शक्ति रावत।
लोग अकसर सवाल करते हैं, कि हम जीवन में लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, लेकिन कुछ ना कुछ गड़बड़ की वजह से सारा काम बिगड़ जाता है, और हम अपने लक्ष्य या योजना से दूर हो जाते हैं। दरअसल दुनिया में हर चीज के अपने नियम हैं, जैसे आप सडक़ पर चलते हैं, तो वहां चलने के अपने नियम हैं, इसी तरह जो लोग नियम से चलते हैं, उनके लिए सफलता की राह आसान हो जाती है। इसीलिये गोल मैनेजमेंट के तहत आज बात करते हैं, उन चार नियमों की जिनका पालन करके आप अपनी योजनाओं और लक्ष्यों के लिए निरंतर बने रह सकते हैं, साथ ही उत्साह के साथ प्रयासों को तेज कर सकते हैं।

1- मूड से ना मांगे सलाह

अकसर आप जब भी किसी जरूरी काम को लेकर लोगों से बात करते होंगे तो आपने एक कॉमन जुमला सुना होगा, कि आज मूड नहीं था। आपके जिंदगी के लिए जरूरी हर काम में यह मूड बड़ी बाधा बन जाता है। फिर चाहे आपका कोई लक्ष्य हो या योजना। इस मामले में प्रसिद्व लेखक बर्नाड शॉ की सुने। उनका नियम था, कि वे रोज कुछ ना कुछ लिखते थे, चाहे उनका मूड लिखने का हो या ना हो। उन्होंने तय कर रखा था, कि मूड चाहे जैसा भी हो वे रोज कुछ ना कुछ लिखेंगे जरूर। तो आप भी जरूरी कामों के लिए मूड की सलाह ना लें, अन्यथा यह आपको आगे बढऩे से रोकेगा।

2-दृढ़ इच्छाशक्ति

जहां इच्छाशक्ति नहीं वहां कोई मंजिल भी नहीं। हम अपने जीवन के कई काम सिर्फ दूसरों को देखकर या फिर संकोच में शुरू कर देते हैं, बिना तैयारी के। लेकिन इससे ना तो लंबी दूरी तय की जा सकती है, ना ही सफलता मिलेगी। क्यों? क्योंकि बिना दृढ़ इच्छाशक्ति के आपकी शुरूआत ही कमजोर है, इसलिये उन्हीं कामों को हाथ में लें, जिनको करने के लिए आपकी इच्छाशक्ति बहुत मजबूत हो, यानि जो थोड़ी सी परेशानी से डगमगा ना जाए।

3- अस्थायी असफलता हार नहीं

अपने भविष्य की बड़ी योजनाओं और लक्ष्यों को लेकर अकसर लोग एक कॉमन गलती करते हैं, वह है, अस्थायी असफलता को हार मान लेना। जब आप कोई काम हाथ में लेंगे तो परेशानी आएगी ही, लेकिन 99 मौकों पर यह अस्थायी होती है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे अपनी असफलता मानकर हार और निराशा में डूब जाते हैं। जो कि उनके लक्ष्य या योजना के लिए नुकसानदायक होता है, एेसे में आप वह भी खो देते हैं, जो आपने इतनी मेहनत से हासिल किया था।

4-ना टूटे निरंतरता

यह पहले नियम से मिलता-जुलता मामला है, अकसर लोग जोश में कोई काम शुरू करते हैं, लेकिन वक्त बीतने के साथ उनकी निरंतरता टूटने लगती है, क्योंकि जोश कम होने लगता है,और गेप आने लगता है, बहाने पैदा होने लगते हैं, जो आपकी राह की सबसे बड़ी बाधा हैं। एक खिलाड़ी जब मैदान पर मेडल जीतता है, तो यह एक दिन में नहीं होता, उसके पीछे उसकी सालों की हर दिन नियमित तौर पर की गई घंटों की मेहनत होती है। लोग मेडल देखते हैं, मेहनत नहीं। लेकिन बिना किसी काम में नियमित हुए यह संभव नहीं है। अगर आप किसी काम में निरंतर या नियमित नहीं हैं, तो इसका मतलब आप खुद ही मंजिल से दूर हो रहे हैं, वह काम छोटा हो या फिर बड़ा।
-लेखक मोटीवेशनल स्पीकर और लाइफ मैनेजमेंट कोच हैं।


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