INDORE ऑपरेशन दीनबंधु: केवल 2 जिलों में काम, शेष 5 जिलों में बातें - MP NEWS

Bhopal Samachar
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इंदौर
। लावारिस लोगों को कचरे की तरह शहर से बाहर डंप करने के मामले में सरकार ने जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की नाही मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया लेकिन कमिश्नर इंदौर संभाग में ऑपरेशन दीनबंधु लॉन्च कर दिया है। इसके तहत लावारिस लोगों का पुनर्वास किया जाना है। संभाग के 7 जिलों में से सिर्फ 2 जिलों में काम शुरू हुआ है शेष 5 जिलों में बातें सुनाई दे रही है। 

ऑपरेशन दीनबंधु: सबसे पहले पढ़िए इंदौर संभाग के सभी 7 जिलों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट

इंदौर: सिर्फ इतना बताया कि अरविंदो हॉस्पिटल के सहयोग से मेडिकल चेकअप कराने का अभियान चलाया जा रहा है। कितने लोगों का चेकअप हुआ, फोटो वीडियो आदि कुछ भी समझ में नहीं है और ना ही सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए हैं। 
बड़वानी: कलेक्टर श्री शिवराज वर्मा ने सिर्फ एक विक्षिप्त व्यक्ति को स्थान करवाया, हजामत बनवाई, भोजन दिया और रैन बसेरा में रुकवाने की व्यवस्था की। (खबर कुछ इस तरह से आई है जैसे कलेक्टर ने अपने वेतन में से यह सब कुछ किया हो। शेष लावारिस नागरिकों का क्या हुआ कोई हिसाब नहीं है।) 

खरगोन: 40 कंबल और 100 भोजन के पैकेट वितरित किए गए। (इस प्रकार जिला प्रशासन ने खुद को एक समाजसेवी संस्था के रूप में प्रस्तुत कर दिया। जबकि लावारिस नागरिकों की देखभाल प्रशासन की जिम्मेदारी है।) 

खण्डवा: नगर निगम ने 42 ऐसे लोग चिन्हित किये हैं जो फुटपाथ पर सोते है उन्हें पार्वती बाई धर्मशाला और रेन बसेरे में शिफ्ट किया जा रहा है। (पक्का काम हुआ है पूरा हिसाब किताब दिया गया।)
आलीराजपुर: आलीराजपुर कलेक्टर सुश्री सुरभि गुप्ता ने बताया है जिले में आलीराजपुर, जोबट तथा भाबरा तीन नगरीय निकाय है। तीनों में संभागायुक्त डॉ. शर्मा के निर्देशानुसार दल बनाकर कार्य आरंभ कर दिया गया है। (काम शुरू तक नहीं हुआ।)
धार: कलेक्टर धार श्री आलोक सिंह ने बताया है कि धार में 12 भिक्षुकों को आज रेन बसेरा में लाया गया है। (पक्का काम हुआ है पूरा हिसाब किताब दिया गया।)
झाबुआ: कलेक्टर श्री रोहित सिंह ने बताया कि इस अभियान के लिये तैयारियां की जा रही है। (लावारिस नागरिकों को सड़क से रेन बसेरा में शिफ्ट करने के लिए कौन सी तैयारियां करनी पड़ती है।) 

लावारिस नागरिकों की देखभाल प्रशासन क्यों करें 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में भारत में जन्म लेने वाले प्रत्येक नागरिक को जीवन का अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णय के अनुसार अनुच्छेद 21 के तहत ही उसे पौष्टिक भोजन का अधिकार भी प्राप्त है। राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसे नागरिकों को आवास एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएं जो अपने लिए भोजन और आवास की व्यवस्था करने के लिए सक्षम नहीं है। आंगनबाड़ियों में मासूम बच्चों को पौष्टिक भोजन योजना, निर्धन नागरिकों को आवास योजना इसी संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत संचालित की जाती है। जिले का कलेक्टर या राज्य की सरकार नागरिकों पर एहसान नहीं करती। क्योंकि इसे संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए आम जनता उसे (GST) टैक्स देती है।

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