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INDORE में स्वच्छता के लिए दरिंदगी: पहले भी शहर के बाहर डंप किए गए हैं भिखारी और लावारिस बुजुर्ग - MP NEWS

इंदौर
। भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के माथे पर कलंक लग गया है। सिर्फ एक सवाल गूंज रहा है कि क्या स्वच्छता में नंबर वन बने रहने के लिए दरिंदगी जरूरी है। शहर के बाहर कचरे की तरह डंप किए जा रहे हैं निर्धन भिखारी और लावारिस बुजुर्गों का वीडियो वायरल होने के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इधर सूत्रों का कहना है कि यह सब कुछ पहली बार नहीं हो रहा था। इससे पहले भी ऐसा ही होता रहा है। 

इंदौर से पहले भी इसी तरह डंप किए जाते रहे हैं भिखारी और लावारिस बुजुर्ग 

उज्जैन के जिस जागरूक नागरिक ने इस मामले का वीडियो बनाकर वायरल किया राजेश जोशी का दूसरा बयान सामने आ गया है। राजेश जोशी ने स्थानीय पत्रकारों को बताया कि जब उसने इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि 'शासन के आदेश है, यह लोग इंदौर में गंदगी फैलाते हैं।' नगर निगम कर्मचारी के इस बयान से यह संदेह करने के लिए पर्याप्त कारण प्राप्त होते हैं कि जो कुछ भी हुआ वह पहली बार नहीं था। 

सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, निलंबन कार्रवाई नहीं होती, व्यवस्था होती है

इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, इंदौर नगर निगम की कमिश्नर प्रतिभा पाल को संरक्षण देते हुए प्रतीत होते हैं। क्योंकि शासन स्तर पर इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। रेन बसेरा के दो अस्थाई कर्मचारियों को बर्खास्त करना, कार्यवाही नहीं कहा जा सकता क्योंकि उन्हें कभी भी बर्खास्त कर दिया जाता है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डिप्टी कमिश्नर को सस्पेंड किया गया है परंतु निलंबन ना तो विभागीय कार्रवाई होती है ना ही सजा। निलंबन केवल जांच की प्रक्रिया की एक व्यवस्था होती है। 

इंदौर कांड पर मुख्यमंत्री SIT गठित क्यों नहीं करते 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामले की निष्पक्ष जांच को बाधित क्यों किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार एक भी इंसान की जान शासन की लापरवाही से नहीं जानी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इसके लिए मुख्य सचिव जिम्मेदार माना जाता है। क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि इससे पहले भी कई निर्धन और लावारिस नागरिकों को इसी तरह इंदौर शहर के बाहर डंप किया गया। शायद इंदौर के बाहर खाली मैदान, जंगल, नदी नाले आदि में कुछ लावारिस नागरिकों के कंकाल हो सकते हैं। बेहद गंभीर मामला है। सवाल सिर्फ इतना सा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की तत्काल जांच के लिए SIT गठित क्यों नहीं करते जो अधिकतम 1 सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी।

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