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DEWAS: कुर्की करने गई महिला तहसीलदार को शहर काजी ने धमकाकर भगाया - MP NEWS

देवास
। इसी सप्ताह इंदौर में एक व्यक्ति ने नगर निगम की टीम को प्रॉपर्टी टैक्स देने से मना कर दिया था। इस बात से नाराज हुए नगर निगम कमिश्नर ने ना केवल उसकी प्रॉपर्टी कुर्क कर ली बल्कि उसके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का मामला भी दर्ज किया गया परंतु देवास में शासकीय शुल्क की वसूली करने आई महिला तहसीलदार को शहर काजी ने धमका कर भगा दिया। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

शहर का माहौल खराब करने की धमकी 

मामला नुसरत नगर में संचालित एक मदरसे का है। जहां शनिवार को प्रशासन की टीम शासकीय शुल्क की वसूली ना होने के कारण कुर्की करने पहुंची। इस दौरान वहां पर मौजूद शहर काजी ने शासकीय शुल्क देने से इंकार कर दिया और तहसीलदार पूनम तोमर के साथ ना केवल बहस की बल्कि यहां तक बोल दिया कि "क्या आप शहर का माहौल खराब करना चाहती हैं ?"

मामला क्या है, मदरसे से कौन सा शुल्क वसूलना है

दरअसल 2009 और 2010 में देवास के नुसरत नगर स्थित जमीन पर शैक्षणिक डायवर्जन कर मदरसे का निर्माण किया गया था, लेकिन मदरसे के बाहर खुली जमीन पर 2013-14 में ग्वालियर से महालेखाकार की ऑडिट टीम ने आपत्ति लगाकर 1 लाख 66 हजार का शासकीय शुल्क भरने का आदेश जारी किया गया था। 

कुर्की की कार्रवाई करने गई थी प्रशासनिक टीम

2013 से अभी तक मदरसे द्वारा ये राशि जमा नहीं की गई थी, जिसके चलते वसूली के लिए कुर्की की कार्रवाई करने प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान शहर काजी ने विवाद शुरू कर दिया और शुल्क देने से मना कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने कुर्की की कार्यवाही भी नहीं होने दी। देवास कलेक्टर ने प्रशासनिक टीम को सपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया बल्कि वापस लौटाने के लिए कहा।
 

तहसीलदार का क्या कहना है

तहसीलदार पूनम तोमर ने इस मामले में बताया कि 'नुसरत नगर में स्थित एक मदरसे में प्रशासन की टीम कार्रवाई करने पहुंची थी, जहां से वसूली नहीं हो पाई है.आज से प्रशासन की टीम ने शासकीय शुल्क की वसूली का अभियान शुरू कर दिया है, 30 मार्च तक शासकीय शुल्क की वसूली की जाएगी'।

मदरसा समिति का क्या कहना है

इस मामले में मदरसे संचालन समिति का कहना है कि मदरसे में गरीब बच्चों की तालीम होती है और ऐसे मदरसों को सरकार भी मदद करती है। ऐसे में मदरसों पर इस तरह की कार्रवाई अनुचित है। 

KNOWLEDGE: नियमानुसार क्या होना चाहिए 

महालेखाकार ने सन 2013-14 में शासकीय शुल्क अधिरोपित किया था। यदि इस पर किसी को आपत्ति है तो वह सक्षम प्राधिकारी के समक्ष इसके खिलाफ अपील कर सकता है। सरकार से शुल्क माफी भी करवाई जा सकती है। यदि कोई अपील नहीं करता तो यह माना जाता है कि उसने निर्णय को स्वीकार कर लिया है। ऐसी स्थिति में उसे शुल्क अदा करना होगा अन्यथा प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध नहीं कर सकता।

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