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BHOPAL आजादी के बाद भी तिरंगा लहराना अपराध था, नवाब ने 6 लड़कों को मार डाला था - BHOPAL HISTORY

भोपाल
। 14 जनवरी मकर संक्रांति का पर्व सभी लोग धूमधाम से मनाते हैं लेकिन भोपाल की यादों में कुछ और भी है। मकर संक्रांति का दिन वही दिन है जब भोपाल में पहली बार तिरंगा लहराया गया था और इस गुनाह के लिए भोपाल के नवाब की पुलिस ने 6 लोगों को गोली मार दी थी। उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान इसी नवाब परिवार के वारिस हैं।

कहानी 14 जनवरी 1949 की है। लगभग 2 साल पहले दिनांक 15 अगस्त 1947 को भारत देश को आजाद हो गया था परंतु भोपाल की जनता नवाब की गुलाम थी। भोपाल का नवाब अपनी रियासत को भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान में मिलाना चाहता था। इसके लिए उसने पाकिस्तान में भोपाल हाउस भी बनवा लिया था। भोपाल रियासत के इलाके में वंदे मातरम कहना और तिरंगा लहराना गुनाह था। जबकि भोपाल रियासत की जनता भारत में शामिल होकर अपने नवाब से स्वतंत्र होना चाहती थी। 

दिल्ली में गठित हो चुकी पंडित जवाहरलाल नेहरु की सरकार तक मदद के लिए और भोपाल के नवाब तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए बोरास गांव (रायसेन जिले में स्थित) में तय किया गया कि मकर संक्रांति के मेले के अवसर पर तिरंगा लहराया जाएगा। नर्मदा तट पर स्थित बोरास गांव में तिरंगा लहराने की सूचना भोपाल के नवाब को मिल गई तो उसने अपने क्रूर थानेदार जाफर खान को तैनात कर दिया। 

जाफर खान अपनी सेना को लेकर संक्रांति के मेले में पहुंच गया। उस ने ऐलान किया कि यदि किसी ने भी भारत के राष्ट्रीय ध्वज को लहराने की कोशिश की तो उसे गोली मार दी जाएगी। इसी दौरान 16 साल का एक नवयुवक (नाम धन सिंह) भीड़ को चीरता हुआ सामने आया और तिरंगा लहरा दिया। जाफर खान ने उसे गोली मार दी। जफर खान की गोली से धन सिंह तो जमीन पर गिरा लेकिन उसके दोस्तों ने तिरंगा नहीं गिरने दिया। एक के बाद एक नवयुवक जमीन पर गिरते तरंगे को थामते रहे और जाफर खान उन्हें गोली मारता रहा। इस तरह कुल 6 युवकों को गोली मार दी गई।

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