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मप्र युवा कांग्रेस चुनाव गड़बड़ी: 2.40 लाख सदस्यों को वोट डालने नहीं दिया - MP NEWS

भोपाल
। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से नेपोटिज्म का शिकार हो चुकी है। अब तो हालात यह है कि बड़े नेता के बेटे को बड़ा पद दिलाने के लिए नियम और प्रक्रिया है बदली जा रही है। मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस का ऑनलाइन इलेक्शन हाईजैक कर लिया गया। 3.50 लाख मतदाताओं में से केवल 1.10 लाख युवाओं को वोट डालने दिया गया जबकि 2.40 लाख युवाओं का मताधिकार बड़ी ही चतुराई के साथ छीन लिया गया। देश में इन दिनों नए कृषि कानून मुद्दा बने हुए हैं। कांग्रेस पार्टी आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन कर रही है लेकिन मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के 240000 कार्यकर्ता कंफ्यूज है कि वह पुतला किसका जलाएं। कांग्रेस कार्यकर्ता बंद कर नरेंद्र मोदी सरकार का या फिर उन्हें वोट डालने से रोकने की नीति और नियम बनाने वाले कांग्रेस नेताओं का।

मध्य प्रदेश कांग्रेस का पेटेंट कमलनाथ के पास, राहुल गांधी को शिकायतें भेज रहे हैं लोग 

मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ऑनलाइन इलेक्शन में हुई गड़बड़ियों को लेकर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी एवं युवक कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को शिकायतें भेज रहे हैं। हालांकि व्यवहारिक तौर पर इन शिकायतों का कोई लाभ नहीं होना क्योंकि मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी का पेटेंट कमलनाथ के पास है। उनका फैसला ही अंतिम फैसला होगा। राहुल गांधी के बयान को तो कमलनाथ पहले भी नकार चुके हैं और प्रमाणित करने की जरूरत नहीं कि कमलनाथ के मामलों में राहुल गांधी फैसला लेने की क्षमता नहीं रखते।

मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस ऑनलाइन इलेक्शन में क्या गड़बड़ी हुई 

आरोप है कि वोटिंग के बाद नए नियम जारी किए गए। यह नियम सोमवार सुबह 9 बजे डीआरओ ने सोशल मीडिया पर जारी किए गए हैं। चुनाव से पहले तक सदस्य बनाए गए, लेकिन 2018 की वोटर लिस्ट के आधार पर ऑनलाइन वोटिंग करा दी गई। 27 फरवरी 2020 को ऑनलाइन मेंबरशिप शुरू की गई, जिसकी फीस 125 रुपए प्रति सदस्य ली गई थी। सदस्यता अभियान का कोई फायदा नहीं हुआ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नाम पर गड़बड़ी की गई

मध्य प्रदेश में युवक कांग्रेस के चुनाव 6 साल बाद हुए। इसके लिए 10, 11 और 12 दिसंबर को ऑनलाइन वोटिंग हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम से वोटिंग कराए जाने से हर जिले में सैकड़ों सदस्य वोट नहीं डाल पाए या फिर उनका वोट रद्द हो गया। चुनाव के तरीके को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि वोटिंग के बाद दिशा-निर्देश जारी क्यों किए गए। नए नियमों के अनुसार एक वोट के रद्द होने के केस में वह वोट सभी कमेटियों के परिणाम से हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि एक सदस्य द्वारा डाले गए सभी 5 वोट अमान्य हो जाएंगे। चुनाव में मात्र 1.10 लाख सदस्यों ने वोटिंग की, जबकि मप्र में वोटर 3.5 लाख हैं। आरोप लगाया गया है कि यह संभव नहीं है कि इतनी कम वोटिंग हुई हो।

प्रदेश अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विवेक त्रिपाठी ने आपत्ति दर्ज कराई है 

प्रदेश अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विवेक त्रिपाठी ने वोटिंग के बाद नियम जारी करने को लेकर चुनाव प्रभारी के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि नियम पहले जारी किए जाना चाहिए थे। वोटिंग होने के तीन दिन बाद नियम जारी होना कोई सुनियोजित एजेंडा का हिस्सा है।

विक्रांत भूरिया ने दिल्ली में डेरा डाला 

पार्टी सूत्रों ने बताया अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार विक्रांत भूरिया दिल्ली में लॉबिंग करने पहुंच गए हैं। दावा किया जा रहा है कि विक्रांत ने सोमवार को एआईसीसी दफ्तर में कई पदाधिकारियों से मुलाकात की है। दरअसल, इस चुनाव में फर्जी वोटिंग की आशंका जताई गई है। विक्रांत ने वोटिंग के बाद गाइडलाइन जारी होने को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने कहा है कि रिजेक्शन की गाइडलाइन वोटिंग से पहले जारी होना चाहिए थी, जिससे कोई भी उम्मीदवार गलती करने से बचता। चुनाव के बाद निर्देश निकालना गलत है।

ये वोट हो जाएंगे रद्द

अस्पष्ट फोटो (धुंधली फोटो, चेहरे पर मास्क, चेहरा छुपा हुआ)
ग्रुप फोटो (फ्रेम में एक से ज्यादा लोगों की उपस्थिति)
एक से ज्यादा बार इस्तेमाल/दोहराई गई फोटो।
हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी फोटोग्राफ का फोटो।
एक IMEI पर निर्धारित से अधिक संख्या के प्रयास वाले वोट।

केवल इन आपत्तियों पर होगा विचार

ऐसे मामले जहां राज्य और जिला के दो उम्मीदवारों के बीच वोटों की संख्या 50 वोट से कम हो रद्द हुए वोट के खिलाफ आपत्ति का संज्ञान लिया जाएगा।
रद्द हुए वोट के खिलाफ आपत्ति करने वाले उम्मीदवार को ऊपर दिए गए मानक के आधार पर रेंडम रद्द वोट दिखलाए जाएंगे।
रद्द किए गए कुल वोट का 10% शिकायतकर्ता के सामने सत्यापित किया जाएगा।

इसलिए कराए गए चुनाव

हाई कमान ने युवक कांग्रेस संगठन में प्रभावी सुधारों के लिए चुनाव प्रक्रिया लागू की गई। ताकि निष्पक्ष तरीके से युवाओं को राजनीति में आने का मौका मिले। मप्र एक मात्र राज्य है, जहां युवक कांग्रेस के चुनाव लगातार टाले गए। मप्र को छोड़कर हर राज्य में हर 3 साल में चुनाव हुए, लेकिन मप्र में 2013 के बाद अब चुनाव कराए गए हैं। 

निकाय चुनाव में हो सकता है नुकसान

युवक कांग्रेस चुनाव को लेकर जिस तरह से कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। इससे साफ है कि नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को इसका नुकसान हो सकता है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया में धांधली को लेकर प्रदेश के लगभग हर जिले में युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में रोष देखा जा रहा है।

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