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स्वयं के स्पर्श से गुदगुदी क्यों नही होती, कुछ खास स्थानों पर ही गुदगुदी क्यों होती है, गुदगुदी से हंसी क्यों आती है - GK IN HINDI

गुदगुदी, एक ऐसा एहसास है जो अबोध बच्चे को भी होता है। एक नवजात शिशु सबसे पहले स्पर्श को पहचानता है। उसे हँसाने के लिए हम अक्सर गुदगुदी करते हैं। रूठे हुए को मनाने के लिए गुदगुदी का उपयोग किया जाता है। सवाल यह है कि किसी और के गुदगुदी करने पर हंसी क्यों आती है, शरीर के कुछ खास अंगों पर ही गुदगुदी क्यों होती है और स्वयं के स्पर्श से गुदगुदी क्यों नहीं होती।

स्वयं के स्पर्श से गुदगुदी क्यों नहीं होती

न्यूरोसाइंटिस्ट मिषाएल ब्रेष्ट का कहना है कि स्वयं के स्पर्श पर शरीर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता क्योंकि मस्तिष्क को पता होता है कि आप क्या करने वाले हैं। आपका दिमाग उसके लिए तैयार होता है। यही कारण है कि आप खुद को गुदगुदी नहीं कर सकते। जर्मनी में ह्यूमरकेयर इंस्टीट्यूट में मनोवैज्ञानिक मिषाएल तित्से के मुताबिक "अगर हम खुद को छूते या गुदगुदी करते हैं तो हमारा मस्तिष्क यह बात जानता है कि ये छुआ जाना नुकसानदायक और महत्वपूर्ण नहीं है। इसलिए वो इस पर प्रतिक्रिया नहीं देता है।" 

शरीर के कुछ खास अंगों पर ही गुदगुदी क्यों होती है 

केम्पेगौड़ा वैद्यकीय महाविद्यालय, बेंगलुरु से MBBS प्रत्यूष सिंह ने Carol Luscomb (Cardiologist) द्वारा लिखे गए एक ब्लॉक का हिंदी अनुवाद करते हुए बताया कि जिन जगहों पर हमें ज़्यादा गुदगुदी होती है, वहॉं स्नायु (नसें) बाक़ी हिस्सों की तुलना में सतह के ज़्यादा पास होती हैं। पैर और पसलियां गुदगुदी के लिए विशेषतः संवेदनशील होती हैं, हालांकि गर्दन भी संवेदनशील हो सकती है। यह सब कुछ शरीर की बनावट और उम्र पर भी निर्भर करता है। किसी छोटे बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में गुदगुदी की जा सकती है क्योंकि उसकी त्वचा वयस्क व्यक्ति की त्वचा की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती है। 

गुदगुदी करने पर हंसी क्यों आती है

कई लोगों को बस गुदगुदी की सोचने भर से भी हंसी आती है। कभी-कभी गुदगुदी किए जाने से पहले भी हंसी आने लगती है। शोध से पता चला कि जो हिस्सा गुदगुदी किए जाने पर सक्रिय होता है वही हिस्सा गुदगुदी करने से तुरंत पहले उसके विचार मात्र से भी सक्रिय हो जाता है। गुदगुदी करने पर हंसी इसलिए आती है क्योंकि दिमाग को लगता है कि गुदगुदी किया जाना खतरनाक नहीं है तो वह हंसकर तनाव दूर करता है। कई बार आप जब किसी से झूठमूठ का गुस्सा होते हैं तब भी आपको हंसी आ जाती है क्योंकि आपके बैक ऑफ माइंड को पता होता है कि आप जो भाव प्रकट कर रही हैं, वह खतरनाक नहीं है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article (current affairs in hindi, gk question in hindi, current affairs 2019 in hindi, current affairs 2018 in hindi, today current affairs in hindi, general knowledge in hindi, gk ke question, gktoday in hindi, gk question answer in hindi,)


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