कांग्रेस विधायक को भगोड़ा घोषित करने आवेदन, कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया - BHOPAL NEWS

Bhopal Samachar
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भोपाल
। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी के द्रोणाचार्य श्री दिग्विजय सिंह का आशीर्वाद प्राप्त विधायक आरिफ मसूद की गिरफ्तारी तय हो गई है। सांसद एवं विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय ने आरिफ मसूद की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर दिया है। भोपाल पुलिस ने आरिफ मसूद को भगोड़ा घोषित करने के लिए न्यायालय में आवेदन दाखिल किया था।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल की स्पेशल कोर्ट से वारंट जारी

मंगलवार को राजधानी में सांसदों और विधायकों के मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार सिंह की अदालत में तलैया पुलिस की ओर से आरोपी आरिफ मसूद के खिलाफ धारा-82-83 (फरारी की उद्घोषणा) के संबंध में आवेदन पेश किया गया था। न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद आरिफ मसूद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दे दिए। 

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है

उल्लेखनीय है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने के मामले में आरोपी भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को अदालत ने 8 नवंबर को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए मसूद की अग्रिम जमानत अर्जी नामंजूर की थी।

मसूद पर आरोप है कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति का विरोध प्रदर्शन करने के लिए बिना अनुमति के अचानक इकबाल मैदान में हजारों की भीड़ इकट्ठा की और धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला भाषण दिया। तलैया थाना प्रभारी डीपी सिंह ने बताया था कि मसूद और उनके समर्थकों के खिलाफ तलैया थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इनमें से एक मामले में मसूद थाने से ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं। दूसरे मामले में मसूद पर धार्मिक भावनाएं भड़काने की गैर जमानती धारा 153 में केस दर्ज है। सुनवाई में मसूद के वकील ने कहा था कि एक ही मामले में दो एफआईआर दर्ज नहीं हो सकतीं। पहली बार आरिफ मसूद और समर्थकों पर 29 अक्टूबर को तलैया पुलिस ने धारा 188, 269, 279 का अपराध दर्ज किया था, जिसमें आरोपी जमानत पर है।

जमानत नामंजूर करते हुए न्यायाधीश ने लिखा था-

विशेष न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार सिंह ने लिखा कि केस डायरी से पता चलता है कि आरोपी आरिफ मसूद के नेतृत्व हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर फ्रांस के राष्ट्रपति का पुतला दहन किया और उसी दौरान मसूद ने उन्मादी भाषण दिया। आरोपी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के कार्य को भारत में बैठी हिन्दूवादी सरकार सहमति दे रही हैं। मध्य प्रदेश में बैठी हिन्दूवादी सरकार मुस्लिम वर्ग के अपमान को शह दे रहीं है। हिन्दुस्तान की केंद्र व राज्य सरकार कान खोलकर सुन ले, यदि फ्रांस के इस कृत्य का विरोध नहीं किया गया, तो हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे, जिससे हिंदू धर्म में आक्रोश है।

न्यायाधीश ने लिखा कि आरोपियों ने कलेक्टर की बिना अनुमति के प्रदर्शन कर रहे आरिफ मसूद और 2000 लोगों पर कोविड–19 के संक्रमण से बचाव में जारी गाइड लाइन के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन किया। वहीं, दूसरा अपराध उन्मादी भाषण देकर दो संप्रदायों के मध्य आक्रोश पैदा किए जाने के संबंध में है। दोनों अपराध अलग-अलग हैं। आरोपी आरिफ मसूद द्वारा किए गए गंभीर कृत्य को देखते हुए उसे अग्रिम जमानत दिया जाना उचित नहीं है।

छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं
इधर, इस अपराध में विधायक समेत उसके छह समर्थकों पर धारा 153-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई है।
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