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सरसों की खेती कैसे करें, बीज, बुआई, दवाई से कटाई तक पूरी जानकारी - How to cultivate mustard


रबी मौसम में सिंचित एवं असिंचित क्षेत्र में गेहूं के अतिरिक्त सरसों की फसल की भी बुआई करें। सरसों की फसल तीन से चार माह में पक कर तैयार हो जाती है। सरसों की बोवनी का काम अक्टूबर माह में पूरा कर लेना चाहिए, ताकि फसल कीट, रोग व्याधियों एवं पाला आदि प्रकोप से बची रहे। 

अधिक उत्पादन के लिए ट्रेक्टर चलित बुआई की मशीन एवं देशी हल के साथ नाली द्वारा फसल की कतार से कतार की दूरी 30 से.मी. रखकर बीज को 2.5 से 3 से.मी. की गहराई पर ही बोए। बीज को अधिक गहरा बोने पर अंकुरण कम हो सकता है। पौधों से पौधों की दूरी 10 से.मी. रखना चाहिए। 

सरसों की कुछ किस्में जैसे गिरीराज-31, आर.एस.-749 एंव आर.एस.-406 आदि जिनकी 5 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर बीज की मात्रा पर्याप्त हैं। बोनी से पूर्व बीज को 3 ग्राम कार्बेन्डाजाइम प्रति किलोग्राम बीज मात्रा से बीजोपचार करे। सरसों सिंचित फसल में 80 किलोग्राम नत्रजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस एंव 20 किलोग्राम पोटाश एंव असिचित फसल में 40 किलोग्राम नत्रजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस एंव 10 किलोग्राम पोटाश प्रति है. की आवष्यकता होती है जिन क्षैत्रों में गंधक की कमी हो उनमें 20-25 किलोग्राम प्रति है. गंधक तत्व देना चाहिए। 

पलेवा के बाद बोनी करने पर फसल में बुआई के 40-45 दिन बाद सिचाई करने पर भरपूर पैदावार मिलती है। आवश्यकता होने पर 75-80 दिन बाद दूसरी सिंचाई करें। बुआई के 20-25 दिन बाद निंदाई-गुडाई करना चाहिए, साथ ही साथ घने पौधों को अलग कर देना चाहिए। बोनी के तुरन्त बाद एवं अंकुरण से पूर्व आइसोप्रोटूरान अथवा पेन्डीमिथलीन खरपतवारनाशी की 01 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर सक्रिय तत्व का छिडकाव करें। 

इन खरपतवार नाशियों से दोनों ही प्रकार (एक दली व दो दली) के खरपतवार नियंत्रित किए जा सकते है। खरपतवार नाशियों का छिड़काव फ्लेट नोजल से 600 लीटर पानी का प्रति हैक्टेयर उपयोग करें। छिड़काव के समय खेत में उचित नमी का होना आवश्यक है। फसल पर माहू(एफिड) कीट का प्रकोप बादलों वाले मौसम में अधिक होता है। यह कीड़ा बहुत छोटा हरा-पीला या भूरा काले रंग का होता है। यह पौधे के तने, फली आदि का रस चूसता है इसके प्रकोप से फलियो व बीज में तेल की मात्रा कम हो जाती है। 

अत्यधिक प्रकोप होने पर पत्तियों एंव फलियों पर एक विशेष प्रकार का चिपचिपा मीठा पदार्थ छोड़ जाता है, जिस पर काला फफूंद नामक रोग लग जाता है, इसके नियंत्रण के लिए डायमिथोएट (रोगर) 1000 मिली. प्रति हैक्टेयर के हिसाब से 600 लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करे। 

सरसों की उचित प्रबंधन द्वारा 20-25 क्विटल प्रति हैक्टेयर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है इस लिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि अधिक से अधिक किसान भाई सरसों की बोनी रबी मौसम में करें और अधिक से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके। उपरोक्त जानकारी भोपाल कलेक्टर कार्यालय द्वारा किसानों के हित में जारी। (sarson ka khet quotes, sarson ki kheti ka samay, sarson ki kheti kaise hoti hai, sarson ki kheti kab karen, sarson ki kheti kaise kare, sarson ki kheti jankari, sarson ki kheti ke bare mein, )


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