भगवान श्रीराम के नाना-नानी का नाम क्या था, माता कौशल्या की कथा क्या है - GK IN HINDI

Bhopal Samachar
भगवान श्री राम की कथा में माता कैकेयी का वर्णन कई बार आता है। सभी जानते हैं कि वह केकेय देश के राजा अश्वपति और शुभलक्षणा की कन्या थी। यह वर्णन भी मिलता है कि राजा अश्वपति घोड़ों के देवता थे लेकिन माता कौशल्या के माता-पिता यानी भगवान श्री राम के ननिहाल के बारे में कुछ खास वर्णन नहीं मिलता। जबकि माता कौशल्या 'अदिति' अवतार मानी जाती है। माता कौशल्या को मातृत्व की जीवन्त प्रतिमा और दया, माया, ममता की मन्दाकिनी तथा तप, त्याग, एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति कहा जाता है। आइए जानते हैं माता कौशल्या के माता-पिता (भगवान श्री राम के नाना-नानी) कौन थे। 

भगवान श्री राम की माता कौशल्या के माता-पिता कौन थे

भगवान श्रीराम की माता कौशल्या, कौशल प्रदेश की राजकुमारी थीं। माता कैकेयी की तरह माता कौशल्या का नाम भी उनके प्रदेश पर आधारित था। उनके पिता का नाम सुकौशल और माता का नाम अमृतप्रभा था। कौशल प्रदेश कहां स्थित है। इतिहासकारों एवं विद्वानों ने अलग-अलग वर्णन किया है। कुछ लोग इसे वर्तमान छत्तीसगढ़ मानते हैं तो कुछ इतिहासकार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का क्षेत्र। एक हिंदू ग्रंथ में दक्षिण भारत (ओडिशा) का भी उल्लेख है लेकिन एक चीज सामान है और वह यह कि कौशल प्रदेश एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर एवं स्वाभिमानी देश था।

कौशल्या के भाई कौन थे, भगवान श्री राम के मामा का नाम क्या था 

माता कौशल्या के पिता का नाम सुकौशल था। जो महाकौशल राज्य के राजा थे। यह क्षेत्र वर्तमान में मध्य प्रदेश और और छत्तीसगढ़ में पाया जाता है। राजा सुकौशल एवं रानी अमृतप्रभा कि किसी भी पुत्र संतान का उल्लेख नहीं मिलता। यही कारण है कि महाकौशल की पूरी प्रजा, माता कौशल्या को बहन और भगवान श्रीराम को अपना भांजा मानती है। (Ram ji ke mama ka kya naam tha) यही कारण है कि आज भी महाकौशल क्षेत्र में मामा, अपने भांजे के पैर छूते हैं। उनका पूजन करते हैं।

माता कौशल्या का राजा दशरथ विवाह कैसे हुआ

राजकुमारी कौशल्या के विवाह योग्य होने पर वर की तलाश में चारों दिशाओं में दूत भेजे गए। उसी समय अयोध्या के राजा दशरथ ने साम्राज्य विस्तार अभियान के तहत कुश स्थल के राजा सुकौशल को मैत्री या युद्ध का संदेश भेजा। राजा सुकौशल को भ्रम हो गया कि अयोध्या के राजा दशरथ उनके राज्य को अपने अधीन करना चाहते हैं। स्वाभिमानी एवं स्वतंत्रता प्रिय होने के कारण उन्होंने युद्ध का विकल्प चुना। दोनों के बीच घोर युद्ध हुआ। अंतत: राजा सुकौशल पराजित हो गए। तब राजा दशरथ ने उन्हें अपने अधीन नहीं किया बल्कि मैत्री का प्रस्ताव रखा। राजा दशरथ के मधुर व्यवहार पर राजा सुकौशल मोहित हो गई। उन्होंने इस मैत्री को संबंध में बदलने का प्रस्ताव रखा और इसी के चलते राजा सुकौशल ने बेटी कौशल्या का विवाह राजा दशरथ से करा दिया। राजा दशरथ ने देवी कौशल्या को महारानी का गौरव और सम्मान दिया, जिसने कौशल्या की नम्रता को और अधिक विकसित किया। 

भगवान श्री राम की माता कौशल्या की कथा

आरम्भ से ही कौशल्या जी धार्मिक थीं। वे निरन्तर भगवान की पूजा करती थीं, अनेक व्रत रखती थीं और नित्य ब्राह्मणों को दान देती थीं। माता कौशल्या ने कभी भी राम तथा भरत में भेद नहीं किया। पुराणों में कश्यप और अदिति के दशरथ और कौशल्या के रूप में अवतार भी माना गया। पुराणों में कहा गया है कि प्राचीन काल में मनु और शतरूपा ने वृद्धावस्था आने पर घोर तपस्या की। दोनों एक पैर पर खड़े रहकर ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और वर माँगने को कहा। मनु ने बड़े संकोच से अपने मन की बात कही- “प्रभु! हम दोनों की इच्छा है कि किसी जन्म में आप हमारे पुत्र रूप में जन्म लें।” ‘ऐसा ही होगा वत्स!’ भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा- त्रेतायुग में मेरा सातवां अवतार राम के रूप में होगा। “त्रेता युग में तुम अयोध्या के राजा दशरथ के रूप में जन्म लोगे और तुम्हारी पत्नी शतरूपा तुम्हारी पटरानी कौशल्या होगी। तब मैं दुष्ट रावण का संहार करने माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लूँगा।”  Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article.
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