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स्मार्टचिप मामला: जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा सरकार और कंपनी से जबाब | MP NEWS

ग्वालियर। परिवहन विभाग में कंप्यूटर द्वारा स्मार्टकार्ड लाइसेंस ओर रजिस्ट्रेशन बनाने वाली प्राइवेट कंपनी स्मार्टचिप लिमिटेड के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हाइकोर्ट ग्वालियर की डबल बेंच ने आज मप्र शासन, परिवहन आयुक्त ओर स्मार्टचिप लिमिटेड को नोटिस जारी कर जबाब मांगा।

याचिका कर्ता विजय शर्मा के वकील सुनील कुमार जैन ने बताया कि कंपनी पर आरोप है कि अनुबंध समाप्त होने के 16 माह बाद भी कंपनी बिना अनुबंध के परिवहन विभाग में कार्य कर रही है जनता से ओर सरकार से अवैध रूप से हर माह करोड़ो रूपये की कमाई कर रही है। स्मार्टचिप लिमिटेड ओर परिवहन विभाग के मध्य अनुबंध सितम्बर 2013 में हुआ था। अनुबंध में स्पष्ट लिखा था की अनुबंध अवधि अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के दिनांक से 5 वर्ष के लिए होगी। जो सितम्बर 2018 में समाप्त हो गयी। 

अनुबंध के अनुसार ऐसी स्थिति में यदि अनुबंध समाप्त हो जाये और कंपनी को अगले 5 वर्ष का स्थाई कार्यकाल विस्तार देने  या नए सिरे से टेंडर जारी होने का कोई निर्णय यदि शासन नही ले पाता है तो परिवहन विभाग कंपनी को अधिकतम 6 माह का अस्थाई एक्सटेंशन प्रदान करेगा और इन 6 माह में नए टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इसके हिसाब से 6 माह का अस्थाई एक्सटेंशन फरबरी 2019 में समाप्त हो गया ओर मध्यप्रदेश शासन के गजट नोटिफिकेशन नंबर 536 दिनांक 5-12-2013 के अनुसार भी कंपनी का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है परंतु यह कंपनी अभी तक सरकार से करोड़ो रूपये हर माह का भुगतान प्राप्त कर रही है और तो ओर जनता से भी ऑनलाइन टैक्स पेमेंट ओर ऑनलाइन एप्लीकेशन के नाम पर 70रुपये के प्रति ट्रांजेक्शन के हिसाब से सीधे वसूल रही है। जबकि कंपनी ने ये सेवाएं देने के लिए प्रदेश में कही भी अपने सेवा केंद्र या कियोस्क सेंटर नही खोले है। कंपनी द्वारा की जाने वाली इस अवैध वसूली से व्यथित होकर याचिका कर्ता ने जनहित याचिका दायर की है। 

गौरतलब है कि परिवहन विभाग में कंप्यूटराइज़ेशन का कार्य करने वाली प्राइवेट कंपनी स्मार्ट चिप लिमिटेड हमेशा विवादों में रही है। इस कंपनी पर ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह परिवहन विभाग को गुलाम बनाने के आरोप भी लगे है। कंपनी की ठसक इतनी है कि बिना किसी अनुबंध बिना किसी शासनादेश के करोड़ो रूपये जनता से वसूल रही है। आये दिन कंपनी के कारनामे समाचार पत्रों की सुर्खियां बनते रहते है महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में आपत्ति होने के बाबजूद भी विगत 17 वर्ष से परिवहन विभाग में ठेका प्राप्त करबे में कंपनी कभी कोई समस्या नही हुई। कई राज्यो की काली सूची में शामिल होने के बाद भी दिग्विजय सरकार से लेकर शिवराज सरकार और अब कमलनाथ सरकार में कंपनी का वही रुतबा कायम है। 

कंपनी का यही रुतबा मीडिया में भी देखने को मिलता है प्रदेश के शीर्ष समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल कंपनी के विरुद्ध खबर छापने ओर दिखाने में परहेज करते है। कमलनाथ सरकार के  परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी कंपनी के रुतबे के आगे मौन रहते है। विधानसभा प्रश्न में कंपनी के विरुद्ध जबाब यह कह कर टाल देते है कि जानकारी अभी एकत्रित की जा  रही है।


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