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पहले शराब पिलाई, फिर पति और बेटे के साथ मिलकर प्रेमी की हत्या कर दी | GWALIOR NEWS

ग्वालियर। 80 दिन पहले नगर निगम के डंपर चालक अखिलेश साहू के अंधे कत्ल की गुत्थी पुलिस ने रविवार को सुलझा ली। उसकी हत्या साफी से गला घोंटकर की गई थी। हत्या को हादसा बताने के लिए शव कांच मिल स्थित रेलवे ट्रैक पर फेंका गया था। चालक की हत्या चार बच्चों की मां अंजुम खां से प्रेम संबंधों के कारण हुई थी। परिवार, मोहल्ला व समाज में प्रेम-संबंध उजागर होने के बाद अंजुम ने अखिलेश से छुटकारा पाने के लिए अपने बेटे सौरभ व उसके दोस्त गोरे उर्फ सलमान और पति मुश्ताक खां की मदद ली। 

प्रेमी की हत्या कर एक दिन उसका शव बाथरूम में छिपाकर रखा फिर ट्रैक पर फिंकवा दिया था। मृतक का मोबाइल भी गायब थी। परिजन से कोई सुराग नहीं मिलने के बाद पुलिस ने मृतक के मोबाइल पर फोकस किया और आरोपितों तक पहुंचने में सफल हो गई। आरोपितों ने पुलिस के सामने गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस ने कार भी जब्त कर ली है। 20 दिसंबर की सुबह पुलिस को रेलवे ट्रैक के किनारे रहने वाले लोगों ने सूचना दी कि किसी व्यक्ति का शव ट्रैक पर पड़ा है। पुलिस ने मौके पर पहुंची तो मृतक के दोनों पैर कटे हुए थे और गले से साफी लिपटी थी। मुंह में भी साफी ठूसी हुई थी। लाश के पास आधा भरा क्वार्टर भी रखा था। मृतक की जेब से मिले दस्तावेजों से उसकी पहचान अखिलेश (40) पुत्र अयोध्या प्रसाद साहू निवासी माता वाली गली नाका चंद्रवदनी के रूप में हुई थी। वह नगर निगम में चालक था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया कि साफी से गला घोंटकर अखिलेश की हत्या की गई है। रिपोर्ट के बाद हत्या का मामला भी दर्ज कर लिया गया। 

एसपी नवनीत भसीन के आदेश पर सीएसपी रवि भदौरिया ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझने टीआई आलोक परिवार के नेतृत्व टीम गठित करने के निर्देश दिए। इस टीम में एसआई अवधेश सिंह कुशवाह, गौर नगावत, नरेंद्र छिंकारा, त्रिवेणी राजावत, प्रधान आरक्षक शैलेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह, आरक्षक जनक सिंह, राजीव शुक्ला, शिव सिंह, लेखराज, कुलदीप, पंकज, जितेंद्र सरला व सायबर सेल में पदस्थ आरक्षक जितेंद्र शर्मा को शामिल किया गया। 

पुलिस को पता चला कि अखिलेश का अबाड़पुरा निवासी मुश्ताक खां के घर 8 साल से काफी आना-जाना था। अखिलेश का शैलेंद्र के जरिए मुश्ताक से परिचय हुआ था। शैलेंद्र व मुश्ताक पड़ोसी हैं। पहले अखिलेश पीने-खाने के लिए शैलेंद्र के घर आता-जाता था। मुश्ताक भी पीने का शौकीन था, इसलिए वह भी इनके साथ बैठने लगा। शराब की महफिल मुश्ताक के घर जमती और खर्च अखिलेश करता था। इस दौरान अखिलेश के मुश्ताक की पत्नी अंजुम से प्रेम संबंध बन गए। दोनों को साथ घूमते-फिरते देख प्रेम संबंध जगजाहिर हो गए। इसके बाद पड़ोसी व समाज के लोग अखिलेश को देखकर मुश्ताक से बच्चों से कहने लगे थे कि तुम्हारे दूसरे पापा आ गए। मां को अखिलेश के साथ बड़े बेटे सौरभ ने आपत्तिजनक हालत में देख भी लिया था। दोनों बेटे व बेटी इन संबंधों का विरोध करने लगे। लेकिन अखिलेश परिवार के लोगों के विरोध के बाद भी अंजुम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद अंजुम ने उसे रास्ते से हटाने के लिए बेटे व उसके दोस्त सलमान और पति की मदद की। अंजुम ने छोटी बेटी की शादी सलमान से करने का झांसा देकर उसे भी हत्या में शामिल कर लिया।

18 दिसंबर की रात अंजुम से मिलने अखिलेश उसके घर आया। मुश्ताक ने योजना अनुसार पहले उसे जमकर शराब पिलाई। बेसुध होने पर सौरभ, सलमान, मुश्ताक व अंजुम ने अखिलेश की गला घोंटकर हत्या कर दी। रात में शव को ठिकाने नहीं लगा सके, इसलिए बाथरूम छिपाकर रखा। 19 की रात को सौरभ मामू से नैनों कार मांगकर लाया। अंधेरे में ही शव को कार में डालकर रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया।


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