भारत के कुछ अजीबो गरीब कानून: गणतंत्र दिवस विशेष | GK IN HINDI
       
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भारत के कुछ अजीबो गरीब कानून: गणतंत्र दिवस विशेष | GK IN HINDI

इन दिनों पूरा भारत गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों में व्यस्त हैं। एक बार फिर सारा भारत पूरे जोश के साथ दोहराएगा " हम भारत के नागरिक, भारतीय संविधान में पूरी आस्था रखते हैं और घोषणा करते हैं कि हर कानून का पालन करेंगे।" किसी भी देश की तरक्की तभी हो सकती है जबकि उसके नागरिक कानून का पालन करें। कानून, जो जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि बनाते हैं। भारत का संविधान सांसद और विधायकों के समूह को कानून बनाने का अधिकार देता है। 

भारत में कानून कैसे बनता है

भारत में कानून बनाने की प्रक्रिया बड़ी लंबी है। एक प्रस्ताव से लेकर मसौदा तैयार होने तक लंबी जद्दोजहद के बाद तमाम ब्यूरोक्रेट्स, बुद्धिजीवी, समाज के आम नागरिक पूर्व विद्वान वकीलों द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक बनता है। इस विधेयक को विपक्षी पार्टी के जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाता है। समीक्षा होती है। बहस होती है। कई बार संशोधन होते हैं और उसके बाद जब सदन के ज्यादातर सदस्य, (जो बहुमत के लिए अनिवार्य हैं) सहमत हो जाते हैं तब उसका गजट नोटिफिकेशन होता है और एक नए कानून का जन्म होता है। मजेदार बात यह है कि इतनी लंबी प्रक्रिया के बावजूद भारत में कुछ कानून ऐसे हैं जो आपको भी अजीबो-गरीब लगेंगे। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कानूनों के बारे में:

भारत के कुछ ऐसे कानून जिन पर सवाल उठते हैं

भारत के केरल राज्य में किसी भी व्यक्ति के तीसरा बच्चा पैदा करने पर 10000 रुपये का जुर्माना लगता है। यह कानून जनसंख्या नियंत्रण के लिए बनाया गया है। 
आलोचक सवाल करते हैं कि क्या ₹10000 का जुर्माना लोगों को तीसरा बच्चा पैदा करने से रोक सकता है। उस देश में जहां कई बार चालन बनवाने के बाद भी लोग हेलमेट नहीं खरीदे।

सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती। यदि मामला गंभीर है, प्रतिबंधित समय अवधि में महिला को गिरफ्तार करना अनिवार्य है तो पुलिस को सबसे पहले मजिस्ट्रेट के सामने जाकर लिखित आदेश प्राप्त करना होगा। 
आलोचक कहते हैं कि इस आधुनिक युग में जबकि महिलाएं कई गंभीर अपराधों में पुरुषों के बराबर और कई बार पुरुषों से आगे निकल आई है, गिरफ्तारी के लिए समय अवधि का निर्धारण उचित नहीं है। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले वैसे भी तैनात पुलिस बल की संख्या दिन की अवधि की तुलना में कम ही होती है। ऐसे में यदि किसी महिला अपराधी के छिपे होने का पता चले या फिर चेकपोस्ट पर किसी वाहन में महिला अपराधी नजर आ जाये तो पुलिस क्या करे। उसे गिरफ्तार करे या आधी रात को जाकर किसी मजिस्ट्रेट को जगाए और लिखित आदेश प्राप्त करें।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 2011 में एक कानून बनाया है। इस कानून के तहत एक अकेला पुरुष किसी कन्या को गोद नहीं ले सकता। यानी वह बेटा तो वोट ले सकता है लेकिन बेटी को गोद नहीं ले सकता। 
आलोचक कहते हैं कि महिला सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता अच्छी बात है लेकिन महिला सुरक्षा के नाम पर आप एक पुरुष से कन्यादान का अधिकार नहीं छीन सकते। यह कानून कुछ इस तरह की ध्वनि करता है जैसे हर अकेला पुरुष, अकेली महिला के लिए खतरनाक होता है।

Indian panel code के section 309 के अनुसार आत्महत्या का प्रयास करना अपराध है। आप के खिलाफ मामला दर्ज होगा और 1 साल तक जेल में रहने की सजा मिलेगी लेकिन यदि आप आत्महत्या करने में सफल हो जाते हैं तो आप के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।
कितनी अजीब बात है एक ऐसा अपराध जिस में विफल हो जाने पर सजा मिलती है। सुप्रीम कोर्ट में एक आदेश में कह चुका है आत्महत्या का प्रयास करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होता। उसे जेल में नहीं अस्पताल में भेजना चाहिए। उसे परिवार में भेजना चाहिए।

भारत में यदि महिला या पुरुष यौन संबंधों के दौरान अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाता तो ऐसे ही तलाक का एक आधार माना जाता है। 
कितनी अजीब बात है, यह कानून ध्वनि करता है कि विवाह का मूल आधार यौन संबंध ही होता है जबकि शास्त्रों में लिखा आएगी विवाह एक संस्कार होता है। इसका महत्व इच्छापूर्ति से कहीं अधिक है। 

Prevention of seditious meeting act 1911 के तहत एक डांस फ्लोर पर एक साथ दस से ज्यादा लोग नही नाच सकते।
Dentist act, 1948 के section 49 के chapter V के अनुसार सड़क किनारे दांत निकालना और कान साफ करना गैर कानूनी है
The Land Acquisition Act के तहत सरकार आपका प्लॉट, जमीन या खेत कभी भी आपसे वापस ले सकती है। जमीन की रजिस्ट्री का मतलब जमीन के उस टुकड़े का तब तक उपयोग करने का अधिकार प्राप्त करना जब तक कि सरकार वापस ना ले ले।
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