अतिथि विद्वानों ने कल कफन ओढ़ा था, आज सचमुच मातम मनाना पड़ा, एक मौत | EMPLOYEE NEWS
       
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अतिथि विद्वानों ने कल कफन ओढ़ा था, आज सचमुच मातम मनाना पड़ा, एक मौत | EMPLOYEE NEWS

भोपाल। भोपाल स्थित शाहजहानी पार्क में आज सन्नाटा पसरा हुआ है। रोज़ नारेबाजी और अपने भविष्य के प्रति चिंतित अतिथिविद्वानों के भाषणों से गूंजने वाले पार्क में आज मौत का सन्नाटा है। कारण है टीकमगढ़ महाविद्यालय में पदस्थ रसायनशास्त्र की महिला अतिथिविद्वान डॉ समी खरे का आकास्मिक निधन। अपने साथी के असामयिक निधन से पूरा अतिथिविद्वानों समुदाय सकते में है और सरकार के प्रति आक्रोशित है। इस बीच अतिथिविद्वानों ने सभा आयोजित करके मृतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। 

विदित हो कि पिछले 1 माह से अतिथिविद्वान कमलनाथ सरकार की नीतियों के प्रति आंदोलित है। कारण है सरकार का एक के बाद एक 2700 अतिथिविद्वानों को उनकी 20 वर्ष पुरानी नौकरी से फालेन आउट करके बाहर का रास्ता दिखा देना है। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में पिछले दो दशकों से अध्यापन करने वाले अतिथिविद्वान कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों से संकट के दौर से गुज़र रहे हैं। अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजकद्वय डॉ देवराज सिंह एवं डॉ सुरजीत भदौरिया के अनुसार अतिथिविद्वानों से कांग्रेस पार्टी तथा तत्कालीन पीसीसी चीफ कमलनाथ ने वचनपत्र की कंडिका 17.22 अनुसार नियमितीकरण का वादा किया था किन्तु सरकार बनने के एक वर्ष के अंदर मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने वादे से पलटते हुए न सिर्फ व्यापम 2 के नाम से कुख्यात हो चुकी सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा के तथाकथित चयनितों को नौकरी प्रदान कर दी बल्कि उन पदों पर पिछले दो दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथिविद्वानों को नौकरी से फालेन आउट करके बाहर का रास्ता दिखा दिया। सरकार के इस कदम से प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। अतिथिविद्वानों ने सरकार के इस घातक कदम का हर स्तर पर विरोध किया। भोपाल स्थित शाहजहानी पार्क में अतिथिविद्वानों ने पिछले एक माह से आंदोलन का झंडा गाड़ रखा है। व उच्च शिक्षा विभाग व मंत्री जीतू पटवारी की गलत नीतियों का विरोध कर रहे है।

तनावग्रस्त अतिथिविद्वान की ह्दयाघात से मृत्यु

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय प्रवक्ता डॉ मंसूर अली के अनुसार कांग्रेस सरकार द्वारा अब तक लगभग 2700 अतिथिविद्वान फालेन आउट करके नौकरी से बाहर किये जा चुके हैं। सरकार के इस घातक कदम से समस्त अतिथिविद्वान समुदाय बेहद तनाव और अवसाद के दौर से गुज़र रहा हैं। उच्च शिक्षा विभाग की सेवा करते लगभग अधेड़ हो चुके अतिथिविद्वान अपने भविष्य के प्रति इतने आधिक चिंतित है की वे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य मानसिक व्याधियों के शिकार हो गए है। डॉ मंसूर अली ने आगे बताया की मृतक डॉ समी खरे, शासकीय महाविद्यालय टीकमगढ़ में रसायनशास्त्र विभाग में पदस्थ थी व हाल ही में फालेन आउट करके नौकरी से लगभग 2700 अतिथिविद्वानों को बाहर कर दिए जाने से बहुत तनाव और अवसाद से ग्रसित थी। डॉ मंसूर अली के अनुसार कुछ दिन पूर्व शाहजहानी पार्क भोपाल में वे हमारे आंदोलन का हिस्सा भी थी। नौकरी चले जाने के भय, अनिश्चित भविष्य तथा कांग्रेस सरकार की वादाख़िलाफी से वे बेहद आहत व तनावग्रस्त थी। वे बार बार यही दुहरा रही थी इस कमलनाथ सरकार ने हमें कहीं का नही छोड़ा, जीते जी मार डाला। हमने प्रदेश में इससे बड़ी निर्दयी सरकार नही देखी है। जो एक के बाद इतने अतिथिविद्वानों की मृत्यु  होने के बाद भी अपनी नींद से जाग नही रही है। सरकार तो नही जागी किन्तु 1 माह के आंदोलन के बाद भी हालात सुधरते न देख डॉ समी खरे इतनी परेशान हुई कि व हालात इतने बिगड़े की उनका दिल इस तनाव को बर्दाश्त नही कर पाया तथा वे हमेशा के लिए मौत की नींद सो गई।

बेहद नाजुक स्थिति में हैं अतिथिविद्वान

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ जेपीएस चौहान एवं डॉ आशीष पाण्डेय के अनुसार आज अतिथिविद्वान समुदाय बेहद तनावग्रस्त हालातों से गुज़र रहा है। एक ओर अनिश्चित भविष्य दूरी ओर जाती हुई नौकरी ने अतिथिविद्वानो को अंदर से तोड़ कर रख दिया है। जिस कांग्रेस पार्टी को अतिथिविद्वानों ने अपना भाग्यविधाता माना था। उसी कांग्रेस पार्टी व कमलनाथ सरकार ने अतिथिविद्वानों का सर्वनाश करके रख दिया है। हाल यह है कि अब तक कई अतिथिविद्वान तनावग्रसित रहने के कारण असमय काल के गाल में समा चुके है। जबकि सरकार है कि उसे अतिथिविद्वानों की सुध लेने की कोई फिक्र तक नही है।