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आतंकवाद की आरोपी सांसद भारत सरकार की रक्षा कमेटी में! | NATIONAL NEWS

भोपाल। कानून कहता है कि जब तक आरोप साबित न हो जाए व्यक्ति अपराधी नहीं कहा जा सकता। भारतीय जनता पार्टी कहती है कि राजनीति में ऐसा व्यक्ति दोषी तो नहीं होता लेकिन दागी होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसी ही एक दागी सांसद को भारत की रक्षा कमेटी का सदस्य बनाया है। इस दागी सांसद का नाम है प्रज्ञा सिंह ठाकुर। प्रज्ञा सिंह भोपाल लोकसभा सीट से सांसद हैं। मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी है। कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने इन्हें आतंकवादी बताया है।

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की कमेटी में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह चेयरमैन है। इसी कमेटी में दागी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सदस्य बनाया गया है। डिफेंस मामलों की इस कमेटी में कुल 21 सदस्य हैं, इनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का भी नाम है। कमेटी में चेयरमैन राजनाथ सिंह के अलावा फारुक अब्दुल्ला, ए. राजा, सुप्रिया सुले, मीनाक्षी लेखी, राकेश सिंह, शरद पवार, जेपी नड्डा आदि सदस्य शामिल हैं।

कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

साध्वी प्रज्ञा के कमेटी में शामिल किए जाने को कांग्रेस पार्टी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कमलनाथ सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने इसकी निंदा की है, उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में फर्क है। उन्होंने कहा कि पीएम ने कहा था कि उनपर कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने ट्वीट किया कि प्रज्ञा ठाकुर को डिफेंस कमेटी में शामिल किया गया है। बीजेपी सरकार ने नेशनलिज्म को नया मॉडल दिया है, बम ब्लास्ट मामले में ट्रायल पर चल रहीं नेता को डिफेंस मामलों की कमेटी में शामिल किया गया। चिंता की कोई बात नहीं, भारत माता की जय। 

उन्होंने लिखा कि कुछ महीनों पहले पीएम ने 'मन से माफ ना करने' की बात कही थी, लेकिन अब संदेश साफ है कि नाथूराम गोडसे के भक्तों के अच्छे दिन आ गए हैं।

प्रज्ञा सिंह का अपना ही नजरिया है, उनके बयान विवादित हो जाते हैं 

मूलता विश्व हिंदू परिषद की नेता प्रज्ञा सिंह ठाकुर का अपना ही नजरिया है। भाजपा से लोकसभा का टिकट मिलने के बाद वह आम जनता के लिए सुर्खियों में आई। उनके विचार और बयान अक्सर विवादित हो जाते हैं क्योंकि वह भारत की विधि और परंपराओं के अनुसार असामान्य होते हैं। उनका पहला बयान था कि एटीएस चीफ हेमंत करकरे की आतंकवादी हमले में इसलिए मौत हुई क्योंकि उन्होंने इसके लिए श्राप दिया था। हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु के क्रम में उन्होंने बयान दिया था कि भाजपा नेताओं के ऊपर ‘मारक शक्ति’ का इस्तेमाल किया गया है। बताने की ‘मारक शक्ति’ एक तांत्रिक क्रिया है और भारत का कानून सांसदों की अनुमति नहीं देता कि वह तांत्रिक क्रियाओं में विश्वास जताया इस तरह का कोई बयान दें। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से नाराज थे

लोकसभा चुनाव के दौरान जब साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था, तो विपक्ष ने काफी हंगामा किया था। बढ़ते विवाद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया था कि वह कभी भी साध्वी प्रज्ञा को मन से माफ नहीं कर पाएंगे। इसी के बाद बीजेपी की ओर से साध्वी प्रज्ञा को विवादित बयान पर कारण बताओ नोटिस दिया गया था और अनुशासनात्मक कमेटी को मामला सौंपा गया था। लोकसभा सदन के भीतर भी जब प्रधानमंत्री सभी सांसदों से मिल रहे थे तो प्रज्ञा सिंह ठाकुर को देखकर उन्होंने मुंह फेर लिया था।