Loading...

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बिना झाबुआ जीत सकते हैं, मध्य प्रदेश नहीं | MY OPINION by ANAND BANDEWAR

मध्यप्रदेश में पिछले कुछ समय से कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी ही पार्टी में प्रताड़ना के शिकार चल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से वह मायूस होकर पार्टी से अलग-थलग हो गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया सहित अपने लेटरहेड से भी कांग्रेस का नाम हटा दिया है। इसी के साथ मध्य प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल शुरू हो गई है लेकिन यह सब कुछ सीएम कमलनाथ के कारण हो रहा है। 

दिग्विजय सिंह पार्ट 2 बनते जा रहे हैं कमलनाथ 

कांग्रेस में कमलनाथ की अपनी पहचान थी। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था जो पार्टी सहित दूसरी पार्टियों के लगभग सभी नेताओं को अपने साथ लेकर चलता था। मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पहले कमलनाथ से नाराज नेताओं की संख्या शून्य के बराबर थी लेकिन अब यह बढ़ती जा रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा प्रभावशाली नेता कमलनाथ से नाराज है क्योंकि वह कमलनाथ की प्रताड़ना का शिकार है। जहां तक दिग्विजय सिंह की बात है तो दिग्विजय सिंह हमेशा से ही मध्यप्रदेश में सिंधिया विरोधी चेहरा रहे हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद कमलनाथ का व्यवहार भी दिग्विजय सिंह जैसा होता जा रहा है। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बिना मध्य प्रदेश कैसे जीतेंगे 

डोर अब टूटने की कगार पर है। इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया हर आखरी उम्मीद के इंतजार में है तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ इस सबसे बेपरवाह। लोकसभा चुनाव हारने के बाद कमलनाथ में ज्योतिरादित्य सिंधिया को महत्व देना कम कर दिया था और झाबुआ उपचुनाव जीतने के बाद उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ देखना भी लगभग बंद कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बिना झाबुआ जैसी विधानसभा सीट जीती जा सकती है लेकिन क्या मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव जीता जा सकता है। 

भाजपाइयों से मुकाबला कैसे करेंगे कमलनाथ 

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के पास दिग्विजय सिंह का मजबूत नेटवर्क तो है परंतु दिग्विजय सिंह प्रदेश के वोट कटाऊ नेता बन कर रह गए हैं। कमलनाथ कैंपों में नेताओं की कमी नहीं है लेकिन मास लीडर एक भी नहीं है। इधर भाजपा के पास जनता को लुभाने वाले नेताओं की फौज मौजूद है। चुनाव के समय जब भारतीय जनता पार्टी चौतरफा हमला करेगी तो बड़ा सवाल यह होगा कि कमलनाथ के पास कौन होगा जो जनता को लुभा सके। जिसके नाम पर भीड़ जमा हो जाती हो। शिवराज सिंह के खिलाफ जबरदस्त माहौल और सत्ता का विरोध होने के बावजूद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी पूर्ण बहुमत लाने में नाकाम रही। यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया की 20 सीट भी कम कर दी जाए तोते मानिए सारे मुगालते दूर हो जाएंगे। कांग्रेस मध्य प्रदेश में एक बार फिर विपक्ष में बैठी नजर आई और कमलनाथ को केंद्र की राजनीति करने दिल्ली जाना पड़ेगा।
लेखक श्री आनंद बंदेवार दिल्ली में समाजसेवी भी है। संपर्क: 981 816 0917