टैगोर कॉलेज ने छात्रों को दिया फर्जी रिजल्ट | INDORE NEWS

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इंदौर। कॉलेज संचालक से प्रताड़ित होकर जहर खाने वाले बीएड छात्र की हालत में सुधार है। मामले के लिए बनी जांच कमेटी के समक्ष छात्र ने कॉलेज से जुड़ी कई जानकारी दी। इसके बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। खास यह है कि भले ही टैगोर शिक्षा महाविद्यालय ऑटोनॉमस (Tagore Education College Autonomous) है मगर फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट जारी (Results released) करने से पहले उसने विश्वविद्यालय से कोई अनुमति नहीं ली है। यहां तक कि रिजल्ट की एक शीट विश्वविद्यालय में भी जमा नहीं कराई। 

प्रबंधन की लापरवाही के बाद अधिकारी अब कॉलेज की ऑटोनॉमी से जुड़े दस्तावेज बुलाने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार तक विश्वविद्यालय से पत्र भेजा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक ऑटोनॉमस कॉलेज को भी रिजल्ट की एक कॉपी विश्वविद्यालय में देनी होती है। गोपनीय विभाग की सील लगाने के बाद ही कॉलेज रिजल्ट जारी कर सकता है। इसके पीछे वजह यह है कि कॉलेज अपने स्तर पर रिजल्ट बदल नहीं सकता। अधिकारी का कहना है कि रिजल्ट की कॉपी इसलिए भी विश्वविद्यालय अपने पास रखता है, क्योंकि विद्यार्थियों को डिग्री विश्वविद्यालय से जारी होती है। ऐसे में कॉलेज की लापरवाही विद्यार्थियों को भुगतना पड़ सकती है। विश्वविद्यालय भी डिग्री तभी दे सकता है, जब उसके पास विद्यार्थियों का डेटा हो। 

नियमों का पालन नहीं करने पर अब कॉलेज पर विश्वविद्यालय कार्रवाई कर सकता है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी का कहना है कि रिजल्ट की कॉपी नहीं देने के मामले में कॉलेज प्रबंधन को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। आत्महत्या की कोशिश करने वाले छात्र अजय मिश्रा ( Ajay Mishra) ने कमेटी को बयान दिए हैं, जिसमें कॉलेज संचालक संजय पारीख (College Director Sanjay Parikh) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र के मुताबिक फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा और रिजल्ट जारी हो चुका है, मगर कॉलेज ने नामांकन नहीं कराया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने तक दूसरे सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षा होना संभव नहीं है, जबकि टैगौर कॉलेज ने बीएड सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा भी करवा ली है। यहां तक कि थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा के लिए छात्रों से आवेदन बुलवाए हैं।

टैगोर कॉलेज को कोर्ट ने सशर्त ऑटोनॉमी देने का फैसला दिया था। सालभर में कॉलेज को नैक निरीक्षण करवाना था, लेकिन अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। मामले में विश्वविद्यालय का कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल विभाग कॉलेज से ऑटोनॉमी से संबंधित दस्तावेज बुलाने की तैयारी में है। डीसीडीसी सुमंत कटियाल का कहना है कि कॉलेज संचालक से संपर्क नहीं हुआ है। प्रबंधन को पत्र लिखा जाएगा।
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