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मप्र में एससी/एसटी के 80 असिस्टेंट प्रोफेसर अयोग्य, फिर भी नौकरी जारी | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकार कॉलेजों में 2004 से 2006 के बीच भर्ती किए गए करीब 1000 असिस्टेंट प्रोफेसरों में से 80 असिस्टेंट प्रोफेसर अयोग्य हो चुके हैं परंतु फिर भी इनकी नौकरियां जारी हैं। सरकार हर बार इन्हे लास्ट चांस देती है और वेतन व अन्य लाभ जारी रहते हैं। एक बार फिर यही प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पत्रकार श्री अभिषेक दुबे की रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग के सरकारी कॉलेजों के लिए साल 2004 से 2006 के बीच एसटी और एससी के बैकलॉग के खाली पदों पर भर्ती की गई थी। इस दौरान करीब एक हजार असिस्टेंट प्रोफेसरों पदों की भर्ती की गई थी। उस दौरान विभाग ने शर्त रखी थी कि इन्हें नियुक्ति के दो साल के अंदर नेट, स्लेट या पीएचडी की डिग्री हासिल करनी होगी। इसके बाद विभाग ने साल 2009 और 2017 में फिर से इनके लिए आदेश जारी किए थे।

इनसे कहा गया था कि जिन्होंने अब तक नेट, स्लेट या पीएचडी की डिग्री हासिल नहीं की है वे डिग्री हासिल कर लें। लेकिन इसके बाद भी जब कई असिस्टेंट प्रोफेसरों ने आदेश का पालन नहीं किया तो सभी सरकारी कॉलेजों को पत्र लिखकर इनके बारे में जानकारी मंगाई गई थी। विभाग ने कॉलेजों के प्रिंसिपलों से पूछा था कि 2004 से 2006 के बीच भर्ती असिस्टेंट प्रोफेसरों ने नेट, स्लेट या पीएचडी की डिग्री कब हासिल की है। यदि हासिल नहीं की है तो उसकी भी जानकारी भेजें। इस जानकारी के आधार पर विभाग ऐसे असिस्टेंट प्रोफेसरों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

परवीक्षा की समयावधि में बदलाव की तैयारी

इसके साथ ही विभाग इनकी परवीक्षा समयावधि में भी बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इनकी भर्ती के दो साल बाद विभाग ने इनकी परवीक्षा अवधि समाप्त कर दी थी। साथ ही नियमानुसार पे-बैंड, इन्क्रीमेंट का लाभ देना शुरू कर दिया था लेकिन अब इनकी परवीक्षा अवधी तब समाप्त मानी जाएगी जिस तारीख को इन्होंने नेट, स्लेट या पीएचडी की डिग्री हासिल की है। ऐसे में इन्क्रीमेंट समेत अन्य लाभ की तारीख भी बदल जाएगी। विभाग इनसे रिकवरी भी कर सकता है।

विभाग नहीं करे बदलाव

विभाग असिस्टेंट प्रोफेसरों की परवीक्षा समाप्त करने की समयावधि में जो बदलाव करने जा रहा है, उससे उन्हें आर्थिक नुकसान होगा। विभाग को ऐसा न करते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। -डॉ. कैलाश त्यागी, अध्यक्ष प्रदेश प्राध्यापक संघ

शासन लेगा इनके बारे में निर्णय

अब तक की जानकारी के मुताबिक करीब 80 असिस्टेंट प्रोफेसरों ने 15 साल में भी नेट, स्लेट या पीएचडी की डिग्री हासिल नहीं की थी। इनकी जानकारी तैयार कर शासन को भेज रहे हैं। साथ ही परवीक्षा की समयावधि क्या रहेगी इसके बारे में भी विभाग ही निर्णय लेगा। - पन्नालाल सनोडिया, ओएसडी उच्च शिक्षा विभाग