मप्र भाजपा के 123 मंडलों में उम्र के कारण चुनाव अटका

Bhopal Samachar
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी संगठन चुनाव में रस्साकशी जारी है। उम्र का पैमाना भारी पड़ रहा है। बैठकों का दौर जारी है। 900 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर तो मोहर लग गयी लेकिन 123 मंडलों में उम्र को लेकर बड़ा पेंच फंसा है। इन मंडलों पर हो रहे विवाद को सुलझाने के लिए शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह और सुहास भगत ने मोर्चा संभाल लिया है।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से लेकर अब तक बीजेपी संगठन में बदलाव का दौर जारी है। संगठन को मजबूत करने के लिए मंडल स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्तियां की प्रक्रिया चल रही है। बैठकों के बाद भी अध्यक्षों के नाम का ऐलान नहीं हो सका है। दो बैठकों के बाद भी मामला सुलझ नहीं पा रहा। उम्र के विवाद की वजह से कई मंडलों पर पेंच फंसा हुआ है।

900 पर सहमति, 123 पर पेंच

मध्य प्रदेश में 1023 मंडल हैं। इन सभी पर चुनाव हो चुके हैं लेकिन विवाद उम्र को लेकर अभी भी चल रहा है। दरअसल, संगठन ने मंडल अध्यक्ष की उम्र 40 तक तय की है। इसमें 35 उम्र वालों को प्राथमिकता और बाद में 40 उम्र वाले को अध्यक्ष बनाने का प्रावधान है। चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और अब चुनाव के बाद उम्र को लेकर विवाद जारी है। दो दिन से बीजेपी मुख्यालय में चल रहे बातचीत के दौर से 900 मंडलों पर अध्यक्ष को चुन लिया गया है।

शिवराज, सुहास भगत, राकेश सिंह ने संभाला मोर्चा

अभी भी 123 मंडलों पर पेंच फंसा हुआ है। इस पेंच को सुझलाने और आम सहमति बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और संगठन महामंत्री सुहास भगत को मैदान में उतरना पड़ा। बीजेपी मुख्यालय में दूसरे दिन भी बैठक चली। कई सांसदों और विधायकों ने अपने चेहतों को मंडल अध्यक्ष बनाने की सिफारिश संगठन से की। कई मंडल अध्यक्षों को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही।

उम्र को लेकर विवाद

बीजेपी प्रदेश निर्वाचन अधिकारी हेमंत खंडेलवाल और सह निर्वाचन अधिकारी विजेश लुनावत भी बैठक में मौजूद थे। खंडेलवाल ने कहा कि 900 मंडलों के लिए अध्यक्ष का चयन हो गया है। बाकी के लिए सहमति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा उम्र का प्रावधान पहले ही तय कर दिया गया था। ऐसे में कोई भी विवाद की स्थिति नहीं बन रही है। बाकी के मंडलों को लेकर तीन नामों का पैनल आया है। उन्हीं नामों में से आम सहमति की कोशिश की जा रही है। उम्र के प्रावधान में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि कोई आपत्ति है, तो उसे भी सुझलाया जाएगा।
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